एकादशी व्रत — हिंदू पवित्र उपवास
विजया एकादशी व्रत
संक्षिप्त परिचय
विजया एकादशी फाल्गुन मास (फरवरी–मार्च) की कृष्ण पक्ष एकादशी को होती है। पद्म पुराण के अनुसार, भगवान राम ने सीता को मुक्त कराने के लिए समुद्र पार करने से पहले यह व्रत रखा था, जिससे उन्हें रावण पर विजय मिली। "विजया" का अर्थ विजय है और यह व्रत सभी प्रयासों में सफलता सुनिश्चित करता है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
सभी प्रयासों में विजय सुनिश्चित होती है, पराजय का भय दूर होता है, साहस और आत्मविश्वास मिलता है, गंभीरतम अपराधों के समान पापों का नाश होता है, और भगवान विष्णु का सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
विधि
दशमी के दिन शाम को एक बार भोजन करें। एकादशी पर जल्दी उठें और स्नान करें। विष्णु मूर्ति के पास जल से भरा कलश रखें। पंचामृत, तुलसी और फूल अर्पित करें। विजया एकादशी कथा का पाठ करें। विष्णु सहस्रनाम जपें। रात्रि जागरण करें। द्वादशी पर व्रत खोलने से पहले ब्राह्मणों को भोजन और वस्त्र दान करें।
व्रत कब रखें
फाल्गुन मास (फरवरी–मार्च) की कृष्ण पक्ष एकादशी। कोई नया उद्यम शुरू करने, परीक्षा देने या चुनौतीपूर्ण कार्य शुरू करने से पहले विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
व्रत नियम
चावल, गेहूँ, जौ, दाल और सभी अनाजों से बचें। प्याज, लहसुन और माँसाहारी भोजन सख्त वर्जित है। फल, दूध, मेवे और सेंधा नमक की अनुमति है। पूर्ण जलरहित व्रत (निर्जला) आदर्श है।
व्रत कैसे खोलें
द्वादशी की सुबह विष्णु की पूजा के बाद व्रत खोलें। पहले किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं या जरूरतमंदों को दान दें। फिर हल्का प्रसाद — फल, दूध या द्वादशी के लिए उपयुक्त तिल की मिठाई — ग्रहण करें।
सामान्य प्रश्न
प्र.विजया एकादशी व्रत क्या है?
विजया एकादशी फाल्गुन मास (फरवरी–मार्च) की कृष्ण पक्ष एकादशी को होती है। पद्म पुराण के अनुसार, भगवान राम ने सीता को मुक्त कराने के लिए समुद्र पार करने से पहले यह व्रत रखा था, जिससे उन्हें रावण पर विजय मिली। "विजया" का अर्थ विजय है और यह व्रत सभी प्रया...
प्र.विजया एकादशी व्रत के व्रत नियम क्या हैं?
चावल, गेहूँ, जौ, दाल और सभी अनाजों से बचें। प्याज, लहसुन और माँसाहारी भोजन सख्त वर्जित है। फल, दूध, मेवे और सेंधा नमक की अनुमति है। पूर्ण जलरहित व्रत (निर्जला) आदर्श है।
प्र.विजया एकादशी व्रत कब रखना चाहिए?
फाल्गुन मास (फरवरी–मार्च) की कृष्ण पक्ष एकादशी। कोई नया उद्यम शुरू करने, परीक्षा देने या चुनौतीपूर्ण कार्य शुरू करने से पहले विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
प्र.विजया एकादशी व्रत के क्या लाभ हैं?
सभी प्रयासों में विजय सुनिश्चित होती है, पराजय का भय दूर होता है, साहस और आत्मविश्वास मिलता है, गंभीरतम अपराधों के समान पापों का नाश होता है, और भगवान विष्णु का सफलता का आशीर्वाद मिलता है।