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खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIमंगलवार, 21 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

दाम्पत्य और विवाह

विवाह योग — कुंडली से विश्लेषण

सप्तम भाव, सप्तमेश, कलत्र कारक शुक्र और शुक्र/गुरु दशा से विवाह के योग और समय का विश्लेषण।

विवाह योग देखें →गुण मिलान करें →

सप्तम भाव

विवाह का मुख्य भाव। सप्तमेश की स्थिति, बल और दृष्टि से पति/पत्नी का स्वभाव और विवाह की संभावना जानें।

शुक्र — कलत्र कारक

पुरुष की कुंडली में शुक्र पत्नी का कारक है। शुक्र की राशि, भाव और दशा विवाह के अनुकूल समय बताती है।

गुरु — स्त्री का कारक

स्त्री की कुंडली में गुरु पति का कारक है। गुरु जब केंद्र या त्रिकोण में हो और अनुकूल दशा हो, तब विवाह के योग बनते हैं।

दशा और गोचर

शुक्र, गुरु या सप्तमेश की महादशा/अंतर्दशा में विवाह की संभावना सर्वाधिक होती है। गोचर में गुरु का सप्तम पर गोचर विवाह को सक्रिय करता है।