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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

एकादशी व्रत, हिंदू पवित्र उपवास

देवउठनी एकादशी (देव प्रबोधिनी)

देवता भगवान विष्णु
प्रकार एकादशी व्रत

संक्षिप्त परिचय

देवउठनी एकादशी (देव प्रबोधिनी एकादशी या कार्तिक शुक्ल एकादशी) वह दिन है जब भगवान विष्णु अपनी चार महीने की ब्रह्मांडीय निद्रा (योगनिद्रा) से जागते हैं जो आषाढ़ एकादशी (देवशयनी) पर शुरू हुई थी। यह दिन चातुर्मास (चार पवित्र महीनों) के अंत और विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत का प्रतीक है।

अंतिम अपडेट: 22 मई 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

सभी शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत होती है, विशेष विष्णु आशीर्वाद मिलता है, तुलसी विवाह संभव होता है, चातुर्मास में संचित बाधाएं दूर होती हैं।

विधि

एकादशी व्रत रखें। तुलसी के साथ विशेष विष्णु पूजा करें। तुलसी विवाह समारोह करें। घर में विष्णु के पाँव के चिह्न बनाएं। विष्णु सहस्रनाम जपें।

व्रत कब रखें

कार्तिक शुक्ल एकादशी, वर्ष में एक बार (अक्टूबर/नवंबर)।

व्रत नियम

मानक एकादशी व्रत नियम: कोई अनाज नहीं, प्याज-लहसुन नहीं, फल और दूध की अनुमति।

व्रत कैसे खोलें

तुलसी पूजा के बाद द्वादशी की सुबह व्रत खोलें।

सामान्य प्रश्न

प्र.देवउठनी एकादशी (देव प्रबोधिनी) क्या है?

देवउठनी एकादशी (देव प्रबोधिनी एकादशी या कार्तिक शुक्ल एकादशी) वह दिन है जब भगवान विष्णु अपनी चार महीने की ब्रह्मांडीय निद्रा (योगनिद्रा) से जागते हैं जो आषाढ़ एकादशी (देवशयनी) पर शुरू हुई थी। यह दिन चातुर्मास (चार पवित्र महीनों) के अंत और विवाह, गृह ...

प्र.देवउठनी एकादशी (देव प्रबोधिनी) के व्रत नियम क्या हैं?

मानक एकादशी व्रत नियम: कोई अनाज नहीं, प्याज-लहसुन नहीं, फल और दूध की अनुमति।

प्र.देवउठनी एकादशी (देव प्रबोधिनी) कब रखना चाहिए?

कार्तिक शुक्ल एकादशी, वर्ष में एक बार (अक्टूबर/नवंबर)।

प्र.देवउठनी एकादशी (देव प्रबोधिनी) के क्या लाभ हैं?

सभी शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत होती है, विशेष विष्णु आशीर्वाद मिलता है, तुलसी विवाह संभव होता है, चातुर्मास में संचित बाधाएं दूर होती हैं।

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