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एकादशी व्रत — हिंदू पवित्र उपवास

तुलसी एकादशी व्रत

देवता भगवान विष्णु और तुलसी देवी
प्रकार एकादशी व्रत

संक्षिप्त परिचय

तुलसी एकादशी व्रत कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी (11वें दिन) को देवउठनी एकादशी के साथ मनाया जाता है जब विष्णु अपनी ब्रह्मांडीय निद्रा से जागते हैं। इस दिन तुलसी विवाह (तुलसी के पौधे का भगवान विष्णु/शालिग्राम से पवित्र विवाह) संपन्न किया जाता है। तुलसी का पौधा देवी लक्ष्मी का सांसारिक रूप माना जाता है और विष्णु को विशेष रूप से प्रिय है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

देवउठनी एकादशी के आशीर्वाद और तुलसी देवी की विशेष कृपा एक साथ मिलती है, सभी पाप दूर होते हैं, मोक्ष मिलता है, समृद्धि और वैवाहिक सुख मिलता है।

विधि

एकादशी व्रत रखें। तुलसी के पौधे को वस्त्र, आभूषण और फूलों से सजाएं। तुलसी विवाह समारोह करें — तुलसी के पास शालिग्राम (या विष्णु की छवि) रखें और विवाह मंत्रों के साथ विवाह संस्कार करें। तुलसी के चारों ओर घी के दीपक जलाएं। विष्णु सहस्रनाम जपें।

व्रत कब रखें

कार्तिक शुक्ल एकादशी — वर्ष में एक बार (अक्टूबर/नवंबर), देवउठनी एकादशी के साथ।

व्रत नियम

मानक एकादशी नियम: कोई अनाज नहीं, प्याज-लहसुन नहीं, फल और दूध की अनुमति। द्वादशी पर व्रत तोड़ना अनिवार्य है।

व्रत कैसे खोलें

द्वादशी की सुबह तुलसी को जल अर्पित करके और विष्णु पूजा पूरी करके व्रत खोलें।

सामान्य प्रश्न

प्र.तुलसी एकादशी व्रत क्या है?

तुलसी एकादशी व्रत कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी (11वें दिन) को देवउठनी एकादशी के साथ मनाया जाता है जब विष्णु अपनी ब्रह्मांडीय निद्रा से जागते हैं। इस दिन तुलसी विवाह (तुलसी के पौधे का भगवान विष्णु/शालिग्राम से पवित्र विवाह) संपन्न किया जाता है। तुलसी ...

प्र.तुलसी एकादशी व्रत के व्रत नियम क्या हैं?

मानक एकादशी नियम: कोई अनाज नहीं, प्याज-लहसुन नहीं, फल और दूध की अनुमति। द्वादशी पर व्रत तोड़ना अनिवार्य है।

प्र.तुलसी एकादशी व्रत कब रखना चाहिए?

कार्तिक शुक्ल एकादशी — वर्ष में एक बार (अक्टूबर/नवंबर), देवउठनी एकादशी के साथ।

प्र.तुलसी एकादशी व्रत के क्या लाभ हैं?

देवउठनी एकादशी के आशीर्वाद और तुलसी देवी की विशेष कृपा एक साथ मिलती है, सभी पाप दूर होते हैं, मोक्ष मिलता है, समृद्धि और वैवाहिक सुख मिलता है।

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