मासिक व्रत — हिंदू पवित्र उपवास
सकट चौथ व्रत
संक्षिप्त परिचय
सकट चौथ (तिलकुटा चतुर्थी या माघ मास की संकष्टी चतुर्थी भी कहलाती है) वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण गणेश व्रतों में से एक है, जो माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (जनवरी/फरवरी) को मनाया जाता है। माताएं मुख्यतः अपने बच्चों की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए यह व्रत रखती हैं। व्रत रात को चंद्र दर्शन के बाद ही तोड़ा जाता है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
बच्चों की दीर्घायु और सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बच्चों के जीवन से बाधाएं दूर होती हैं, पूरे परिवार पर गणेश की कृपा होती है, संकष्ट (सभी कष्ट) दूर होते हैं और बच्चों की शिक्षा व करियर में सफलता मिलती है।
विधि
सूर्योदय से पूर्ण उपवास रखें। दूर्वा घास, मोदक और तिल-गुड़ की मिठाई से गणेश पूजा करें। गणेश मंत्र जपें और सकट चौथ व्रत कथा पढ़ें। प्रसाद में तिल-गुड़ के लड्डू तैयार करें। रात को चाँद देखकर गणेश आरती करें। चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलें।
व्रत कब रखें
माघ मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी — वर्ष में एक बार (जनवरी/फरवरी)। प्रत्येक माह की संकष्टी चतुर्थी को भी मनाया जाता है।
व्रत नियम
सूर्योदय से चंद्रोदय तक पूर्ण उपवास। कोई अनाज या नमक नहीं। दिन में फल और दूध की अनुमति। तिल और गुड़ की मिठाई अनुष्ठानिक प्रसाद है।
व्रत कैसे खोलें
रात को चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलें। पहले गणेश को तिल-गुड़ अर्पित करें, फिर प्रसाद ग्रहण करें।
सामान्य प्रश्न
प्र.सकट चौथ व्रत क्या है?
सकट चौथ (तिलकुटा चतुर्थी या माघ मास की संकष्टी चतुर्थी भी कहलाती है) वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण गणेश व्रतों में से एक है, जो माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (जनवरी/फरवरी) को मनाया जाता है। माताएं मुख्यतः अपने बच्चों की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुरक्षा के...
प्र.सकट चौथ व्रत के व्रत नियम क्या हैं?
सूर्योदय से चंद्रोदय तक पूर्ण उपवास। कोई अनाज या नमक नहीं। दिन में फल और दूध की अनुमति। तिल और गुड़ की मिठाई अनुष्ठानिक प्रसाद है।
प्र.सकट चौथ व्रत कब रखना चाहिए?
माघ मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी — वर्ष में एक बार (जनवरी/फरवरी)। प्रत्येक माह की संकष्टी चतुर्थी को भी मनाया जाता है।
प्र.सकट चौथ व्रत के क्या लाभ हैं?
बच्चों की दीर्घायु और सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बच्चों के जीवन से बाधाएं दूर होती हैं, पूरे परिवार पर गणेश की कृपा होती है, संकष्ट (सभी कष्ट) दूर होते हैं और बच्चों की शिक्षा व करियर में सफलता मिलती है।