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मासिक व्रत — हिंदू पवित्र उपवास

एकादशी व्रत

देवता भगवान विष्णु
प्रकार मासिक व्रत

संक्षिप्त परिचय

एकादशी व्रत शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की 11वीं तिथि (एकादशी) को मनाया जाता है — जिससे यह महीने में दो बार होता है। यह सभी वैष्णव व्रतों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। एकादशी पर उपवास करने और रात भर जागकर (जागरण) विष्णु नाम जप करने से कई जन्मों के संचित पाप दूर होते हैं।

अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

कई जन्मों के पाप नष्ट होते हैं, मोक्ष सुनिश्चित होता है, भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है, उपवास से स्वास्थ्य सुधरता है, आध्यात्मिक प्रगति होती है।

विधि

दशमी (10वीं) की शाम सात्विक भोजन करें। एकादशी पर सूर्योदय से पहले उठें। स्नान करके विष्णु की पूजा करें। निर्जला या फलाहार व्रत रखें। विष्णु सहस्रनाम या हरे कृष्ण मंत्र जपें। रात भर जागें। द्वादशी पर सूर्योदय के बाद व्रत खोलें।

व्रत कब रखें

वर्ष में 24 बार — प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की 11वीं तिथि को। विशेष एकादशियाँ: निर्जला, मोक्षदा, देवउठनी, पुत्रदा, वैकुंठ।

व्रत नियम

चावल, गेहूँ, दाल, प्याज, लहसुन और माँसाहारी भोजन से बचें। निर्जला (पूर्ण जलरहित) व्रत से अधिकतम पुण्य मिलता है। फलाहार (फल, दूध, मेवे) भी स्वीकार्य है।

व्रत कैसे खोलें

द्वादशी पर सूर्योदय के बाद तुलसी के पौधे को जल अर्पित करके, संक्षेप में विष्णु की पूजा करके, फिर प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें।

सामान्य प्रश्न

प्र.एकादशी व्रत क्या है?

एकादशी व्रत शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की 11वीं तिथि (एकादशी) को मनाया जाता है — जिससे यह महीने में दो बार होता है। यह सभी वैष्णव व्रतों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। एकादशी पर उपवास करने और रात भर जागकर (जागरण) विष्णु नाम जप करने से कई जन्मों क...

प्र.एकादशी व्रत के व्रत नियम क्या हैं?

चावल, गेहूँ, दाल, प्याज, लहसुन और माँसाहारी भोजन से बचें। निर्जला (पूर्ण जलरहित) व्रत से अधिकतम पुण्य मिलता है। फलाहार (फल, दूध, मेवे) भी स्वीकार्य है।

प्र.एकादशी व्रत कब रखना चाहिए?

वर्ष में 24 बार — प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की 11वीं तिथि को। विशेष एकादशियाँ: निर्जला, मोक्षदा, देवउठनी, पुत्रदा, वैकुंठ।

प्र.एकादशी व्रत के क्या लाभ हैं?

कई जन्मों के पाप नष्ट होते हैं, मोक्ष सुनिश्चित होता है, भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है, उपवास से स्वास्थ्य सुधरता है, आध्यात्मिक प्रगति होती है।

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