मासिक व्रत — हिंदू पवित्र उपवास
नवमी व्रत
संक्षिप्त परिचय
नवमी व्रत प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की 9वीं चंद्र तिथि (नवमी तिथि) को रखा जाता है। शुक्ल नवमी भगवान राम (क्योंकि राम नवमी चैत्र शुक्ल नवमी को होती है) और देवी दुर्गा (क्योंकि नवमी नवरात्रि का 9वाँ दिन है) से संबंधित है। यह व्रत साहस, धर्म, कठिनाइयों पर विजय और परिवार के स्वास्थ्य के लिए आशीर्वाद हेतु रखा जाता है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
साहस और धर्म मिलता है, विपक्षियों पर विजय सुनिश्चित होती है, परिवार के लिए स्वास्थ्य और दीर्घायु मिलती है, राम या दुर्गा की कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
विधि
नवमी तिथि पर व्रत रखें। पक्ष के अनुसार भगवान राम या देवी दुर्गा की पूजा करें: शुक्ल नवमी — तुलसी, फूल और रामचरितमानस या सुंदरकांड पाठ से राम पूजा; कृष्ण नवमी — लाल फूल और दुर्गा सप्तशती से दुर्गा पूजा। देवी के प्रतीक के रूप में एक कन्या को भोजन कराएं (कन्या पूजा)। शाम की पूजा के बाद व्रत खोलें।
व्रत कब रखें
प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की 9वीं तिथि — वर्ष में 24 बार। चैत्र शुक्ल नवमी (राम नवमी) और आश्विन शुक्ल नवमी (नवरात्रि की महा नवमी) पर सबसे पवित्र।
व्रत नियम
अनाज, प्याज, लहसुन और माँसाहारी भोजन से बचें। फलाहार (फल, दूध, साबूदाना) मानक है। शाम को केवल एक भोजन।
व्रत कैसे खोलें
शाम की पूजा और कन्या पूजा (यदि की जाए) के बाद व्रत खोलें। सात्विक प्रसाद — मिठाई, फल और नवरात्रि नवमी के लिए हलवा-पूड़ी — ग्रहण करें।
सामान्य प्रश्न
प्र.नवमी व्रत क्या है?
नवमी व्रत प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की 9वीं चंद्र तिथि (नवमी तिथि) को रखा जाता है। शुक्ल नवमी भगवान राम (क्योंकि राम नवमी चैत्र शुक्ल नवमी को होती है) और देवी दुर्गा (क्योंकि नवमी नवरात्रि का 9वाँ दिन है) से संबंधित है। यह व्रत साहस...
प्र.नवमी व्रत के व्रत नियम क्या हैं?
अनाज, प्याज, लहसुन और माँसाहारी भोजन से बचें। फलाहार (फल, दूध, साबूदाना) मानक है। शाम को केवल एक भोजन।
प्र.नवमी व्रत कब रखना चाहिए?
प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की 9वीं तिथि — वर्ष में 24 बार। चैत्र शुक्ल नवमी (राम नवमी) और आश्विन शुक्ल नवमी (नवरात्रि की महा नवमी) पर सबसे पवित्र।
प्र.नवमी व्रत के क्या लाभ हैं?
साहस और धर्म मिलता है, विपक्षियों पर विजय सुनिश्चित होती है, परिवार के लिए स्वास्थ्य और दीर्घायु मिलती है, राम या दुर्गा की कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।