मासिक व्रत — हिंदू पवित्र उपवास
गणेश चतुर्थी व्रत
संक्षिप्त परिचय
चतुर्थी व्रत दोनों चंद्र पक्षों की 4वीं तिथि (चतुर्थी) को भगवान गणेश के लिए रखा जाता है। विनायक चतुर्थी (शुक्ल चतुर्थी) और संकष्टी चतुर्थी (कृष्ण चतुर्थी) दो मासिक गणेश व्रत हैं। भाद्रपद में वार्षिक गणेश चतुर्थी का 10 दिनों का महोत्सव मनाया जाता है।
अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
सभी बाधाएं दूर होती हैं, नए उद्यमों में सफलता मिलती है, बुद्धि बढ़ती है, संतान प्राप्ति होती है।
विधि
व्रत रखें। दूर्वा घास, मोदक और लाल फूल से गणेश पूजा करें। गणेश चतुर्थी मंत्र या गणपति अथर्वशीर्ष जपें। गणेश चतुर्थी के दिन चाँद न देखें।
व्रत कब रखें
प्रत्येक चंद्र पक्ष की 4वीं — शुक्ल चतुर्थी (विनायक) और कृष्ण चतुर्थी (संकष्टी)। भाद्रपद में वार्षिक गणेश चतुर्थी सबसे भव्य।
व्रत नियम
अनाज और नमक नहीं। फल, दूध और साबूदाना की अनुमति। चतुर्थी के दिन चाँद देखने से सख्ती से बचें।
व्रत कैसे खोलें
चंद्रोदय के बाद (संकष्टी के लिए) या शाम को गणेश आरती के बाद व्रत खोलें।
सामान्य प्रश्न
प्र.गणेश चतुर्थी व्रत क्या है?
चतुर्थी व्रत दोनों चंद्र पक्षों की 4वीं तिथि (चतुर्थी) को भगवान गणेश के लिए रखा जाता है। विनायक चतुर्थी (शुक्ल चतुर्थी) और संकष्टी चतुर्थी (कृष्ण चतुर्थी) दो मासिक गणेश व्रत हैं। भाद्रपद में वार्षिक गणेश चतुर्थी का 10 दिनों का महोत्सव मनाया जाता है।
प्र.गणेश चतुर्थी व्रत के व्रत नियम क्या हैं?
अनाज और नमक नहीं। फल, दूध और साबूदाना की अनुमति। चतुर्थी के दिन चाँद देखने से सख्ती से बचें।
प्र.गणेश चतुर्थी व्रत कब रखना चाहिए?
प्रत्येक चंद्र पक्ष की 4वीं — शुक्ल चतुर्थी (विनायक) और कृष्ण चतुर्थी (संकष्टी)। भाद्रपद में वार्षिक गणेश चतुर्थी सबसे भव्य।
प्र.गणेश चतुर्थी व्रत के क्या लाभ हैं?
सभी बाधाएं दूर होती हैं, नए उद्यमों में सफलता मिलती है, बुद्धि बढ़ती है, संतान प्राप्ति होती है।