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मासिक व्रत — हिंदू पवित्र उपवास

पूर्णिमा व्रत

देवता भगवान विष्णु / भगवान सत्यनारायण / चंद्रमा
प्रकार मासिक व्रत

संक्षिप्त परिचय

पूर्णिमा व्रत प्रत्येक चंद्र मास की पूर्णिमा (पूर्ण चंद्र) को रखा जाता है। यह भगवान विष्णु, चंद्रमा और पितरों की पूजा के लिए समर्पित है। पूर्णिमा को चंद्र माह का सबसे आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली दिन माना जाता है — पूर्ण चंद्रमा प्रार्थनाओं और प्रसाद को और प्रभावशाली बनाता है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

समस्त चंद्र माह की पूजा का पुण्य मिलता है, भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है, पाप शुद्ध होते हैं, घर में सुख-समृद्धि आती है और सत्यनारायण पूजा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

विधि

सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। शाम को पंचामृत, तुलसी और पीले फूलों से सत्यनारायण पूजा करें। सफेद भोजन (खीर, केला) प्रसाद में चढ़ाएं। विष्णु सहस्रनाम या सत्यनारायण व्रत कथा पढ़ें। ब्राह्मणों को दान करें। चंद्रोदय और शाम की पूजा के बाद व्रत खोलें।

व्रत कब रखें

प्रत्येक पूर्णिमा — वर्ष में 12 बार। विशेष पूर्णिमाएं: गुरु पूर्णिमा (आषाढ़), शरद पूर्णिमा (आश्विन), कार्तिक पूर्णिमा और वट पूर्णिमा (ज्येष्ठ)।

व्रत नियम

अनाज, नमक, प्याज और लहसुन से बचें। फल, दूध, साबूदाना और सात्विक भोजन की अनुमति है। कुछ लोग चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखते हैं।

व्रत कैसे खोलें

चंद्रोदय पर पूर्ण चंद्रमा को अर्घ्य देकर, फिर सफेद प्रसाद (खीर या दूध की मिठाई) ग्रहण कर व्रत खोलें।

सामान्य प्रश्न

प्र.पूर्णिमा व्रत क्या है?

पूर्णिमा व्रत प्रत्येक चंद्र मास की पूर्णिमा (पूर्ण चंद्र) को रखा जाता है। यह भगवान विष्णु, चंद्रमा और पितरों की पूजा के लिए समर्पित है। पूर्णिमा को चंद्र माह का सबसे आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली दिन माना जाता है — पूर्ण चंद्रमा प्रार्थनाओं और प्रसाद ...

प्र.पूर्णिमा व्रत के व्रत नियम क्या हैं?

अनाज, नमक, प्याज और लहसुन से बचें। फल, दूध, साबूदाना और सात्विक भोजन की अनुमति है। कुछ लोग चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखते हैं।

प्र.पूर्णिमा व्रत कब रखना चाहिए?

प्रत्येक पूर्णिमा — वर्ष में 12 बार। विशेष पूर्णिमाएं: गुरु पूर्णिमा (आषाढ़), शरद पूर्णिमा (आश्विन), कार्तिक पूर्णिमा और वट पूर्णिमा (ज्येष्ठ)।

प्र.पूर्णिमा व्रत के क्या लाभ हैं?

समस्त चंद्र माह की पूजा का पुण्य मिलता है, भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है, पाप शुद्ध होते हैं, घर में सुख-समृद्धि आती है और सत्यनारायण पूजा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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