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एकादशी व्रत — हिंदू पवित्र उपवास

पापांकुशा एकादशी व्रत

देवता भगवान विष्णु (पद्मनाभ)
प्रकार एकादशी व्रत

संक्षिप्त परिचय

पापांकुशा एकादशी आश्विन मास (सितंबर–अक्टूबर) की शुक्ल एकादशी को होती है और पापों को धोने के लिए सबसे शक्तिशाली एकादशियों में से एक है। नाम "पाप" (पाप) और "अंकुश" (अंकुश/कांटा) से आता है — व्रत एक अंकुश की तरह भक्तों को पाप और पुनर्जन्म के चक्र से बाहर खींचता है। इस एकादशी का पालन कई जन्मों में जानते-अनजाने किए गए पापों को नष्ट करता है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

कई जन्मों के पाप नष्ट होते हैं, पुनर्जन्म से मुक्ति मिलती है, विष्णु के वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है, पापकर्मों से संचित ग्रह पीड़ाओं के प्रभाव दूर होते हैं।

विधि

दशमी की शाम हल्का सात्विक भोजन करें। एकादशी पर सूर्योदय से पहले उठें। स्नान करें और तुलसी, फूल और पंचामृत से भगवान विष्णु (पद्मनाभ रूप) की पूजा करें। विष्णु सहस्रनाम या पापांकुशा एकादशी मंत्र जपें। पापांकुशा एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें। रात भर विष्णु नाम जपते हुए जागें।

व्रत कब रखें

आश्विन शुक्ल एकादशी — वर्ष में एक बार (सितंबर/अक्टूबर)।

व्रत नियम

चावल, गेहूँ, दाल, प्याज, लहसुन नहीं। निर्जला (जलरहित) से अधिकतम पुण्य मिलता है; फलाहार (फल, दूध, मेवे) भी स्वीकार्य है। सभी माँसाहारी भोजन से बचें।

व्रत कैसे खोलें

द्वादशी पर सूर्योदय के बाद तुलसी जल से व्रत खोलें, फिर भोजन करने से पहले तिल अर्पित करें और गरीबों को दान दें।

सामान्य प्रश्न

प्र.पापांकुशा एकादशी व्रत क्या है?

पापांकुशा एकादशी आश्विन मास (सितंबर–अक्टूबर) की शुक्ल एकादशी को होती है और पापों को धोने के लिए सबसे शक्तिशाली एकादशियों में से एक है। नाम "पाप" (पाप) और "अंकुश" (अंकुश/कांटा) से आता है — व्रत एक अंकुश की तरह भक्तों को पाप और पुनर्जन्म के चक्र से बाह...

प्र.पापांकुशा एकादशी व्रत के व्रत नियम क्या हैं?

चावल, गेहूँ, दाल, प्याज, लहसुन नहीं। निर्जला (जलरहित) से अधिकतम पुण्य मिलता है; फलाहार (फल, दूध, मेवे) भी स्वीकार्य है। सभी माँसाहारी भोजन से बचें।

प्र.पापांकुशा एकादशी व्रत कब रखना चाहिए?

आश्विन शुक्ल एकादशी — वर्ष में एक बार (सितंबर/अक्टूबर)।

प्र.पापांकुशा एकादशी व्रत के क्या लाभ हैं?

कई जन्मों के पाप नष्ट होते हैं, पुनर्जन्म से मुक्ति मिलती है, विष्णु के वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है, पापकर्मों से संचित ग्रह पीड़ाओं के प्रभाव दूर होते हैं।

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