वार्षिक व्रत — हिंदू पवित्र उपवास
मंगला गौरी व्रत
संक्षिप्त परिचय
मंगला गौरी व्रत श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) के प्रत्येक मंगलवार को नई नवेली दुल्हन (विवाह के पहले पाँच वर्षों की) द्वारा रखा जाता है। यह देवी मंगला गौरी — पार्वती का एक स्वरूप — को समर्पित है, जिन्हें पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए पूजा जाता है। यह व्रत पाँच लगातार श्रावण मंगलवारों तक किया जाता है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
पति की दीर्घायु और अच्छा स्वास्थ्य सुनिश्चित होता है, वैवाहिक बंधन मजबूत होता है, वैवाहिक सुख और घरेलू सौहार्द मिलता है, पति को दुर्घटनाओं और बीमारी से सुरक्षा मिलती है।
विधि
श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार व्रत रखें। देवी मंगला गौरी की मिट्टी या धातु की प्रतिमा बनाएं। कुमकुम, हल्दी, फूल, नारियल और मिठाई से 16 प्रकार की सामग्री (षोडशोपचार) से पूजा करें। शाम को मंगला गौरी पूजा करें। मंगला गौरी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
व्रत कब रखें
श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार — प्रति वर्ष लगभग 4 से 5 मंगलवार। विवाह के बाद 5 लगातार वर्षों तक मनाया जाता है।
व्रत नियम
श्रावण के प्रत्येक मंगलवार व्रत रखें। व्रत के दिन माँसाहारी भोजन, नमक और अनाज से बचें। फल, दूध और सात्विक भोजन की अनुमति है। यह व्रत पाँच लगातार श्रावण महीनों (पाँच वर्षों) तक रखा जाता है।
व्रत कैसे खोलें
मंगला गौरी पूजा और आरती पूरी करने के बाद शाम को व्रत खोलें। खाने से पहले सुहागिन महिलाओं को प्रसाद (मिठाई, नारियल, चूड़ियाँ) बाँटें।
सामान्य प्रश्न
प्र.मंगला गौरी व्रत क्या है?
मंगला गौरी व्रत श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) के प्रत्येक मंगलवार को नई नवेली दुल्हन (विवाह के पहले पाँच वर्षों की) द्वारा रखा जाता है। यह देवी मंगला गौरी — पार्वती का एक स्वरूप — को समर्पित है, जिन्हें पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए पूजा जा...
प्र.मंगला गौरी व्रत के व्रत नियम क्या हैं?
श्रावण के प्रत्येक मंगलवार व्रत रखें। व्रत के दिन माँसाहारी भोजन, नमक और अनाज से बचें। फल, दूध और सात्विक भोजन की अनुमति है। यह व्रत पाँच लगातार श्रावण महीनों (पाँच वर्षों) तक रखा जाता है।
प्र.मंगला गौरी व्रत कब रखना चाहिए?
श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार — प्रति वर्ष लगभग 4 से 5 मंगलवार। विवाह के बाद 5 लगातार वर्षों तक मनाया जाता है।
प्र.मंगला गौरी व्रत के क्या लाभ हैं?
पति की दीर्घायु और अच्छा स्वास्थ्य सुनिश्चित होता है, वैवाहिक बंधन मजबूत होता है, वैवाहिक सुख और घरेलू सौहार्द मिलता है, पति को दुर्घटनाओं और बीमारी से सुरक्षा मिलती है।