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वार्षिक व्रत — हिंदू पवित्र उपवास

जन्माष्टमी व्रत

देवता भगवान कृष्ण
प्रकार वार्षिक व्रत

संक्षिप्त परिचय

जन्माष्टमी व्रत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (8वें दिन) — भगवान कृष्ण की जन्म वर्षगाँठ — को रखा जाता है। भक्त दिन भर उपवास करते हैं, झूले के साथ विस्तृत कृष्ण पूजा करते हैं, और मध्यरात्रि तक (जब कृष्ण का जन्म हुआ था) जागते हुए जन्मोत्सव समारोह मनाते हैं।

अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

अपार आध्यात्मिक पुण्य अर्जित होता है, पाप नष्ट होते हैं, कृष्ण का आशीर्वाद मिलता है, मोक्ष सुनिश्चित होता है।

विधि

दिन भर व्रत रखें। कृष्ण प्रतिमा को झूले में सजाएं। हरे कृष्ण मंत्र जपें और भगवद्गीता या भागवत पढ़ें। मध्यरात्रि में शिशु कृष्ण (लड्डू गोपाल) का अभिषेक, श्रृंगार और आरती करें।

व्रत कब रखें

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी — वर्ष में एक बार (अगस्त/सितंबर)।

व्रत नियम

अनाज से बचें। फल, दूध, साबूदाना, पनीर की अनुमति। कुछ लोग निर्जला व्रत भी रखते हैं।

व्रत कैसे खोलें

मध्यरात्रि पर या नवमी (अगली सुबह) को कृष्ण पूजा के बाद पंचामृत और मिठाई से व्रत खोलें।

सामान्य प्रश्न

प्र.जन्माष्टमी व्रत क्या है?

जन्माष्टमी व्रत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (8वें दिन) — भगवान कृष्ण की जन्म वर्षगाँठ — को रखा जाता है। भक्त दिन भर उपवास करते हैं, झूले के साथ विस्तृत कृष्ण पूजा करते हैं, और मध्यरात्रि तक (जब कृष्ण का जन्म हुआ था) जागते हुए जन्मोत्सव समारोह...

प्र.जन्माष्टमी व्रत के व्रत नियम क्या हैं?

अनाज से बचें। फल, दूध, साबूदाना, पनीर की अनुमति। कुछ लोग निर्जला व्रत भी रखते हैं।

प्र.जन्माष्टमी व्रत कब रखना चाहिए?

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी — वर्ष में एक बार (अगस्त/सितंबर)।

प्र.जन्माष्टमी व्रत के क्या लाभ हैं?

अपार आध्यात्मिक पुण्य अर्जित होता है, पाप नष्ट होते हैं, कृष्ण का आशीर्वाद मिलता है, मोक्ष सुनिश्चित होता है।

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