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वार्षिक व्रत — हिंदू पवित्र उपवास

करवा चौथ

देवता भगवान शिव, पार्वती, चंद्रमा
प्रकार वार्षिक व्रत

संक्षिप्त परिचय

करवा चौथ विवाहित हिंदू महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए रखा जाने वाला एक दिन का व्रत है। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (4वें दिन) को दीवाली से एक महीने पहले होता है। महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक पूर्ण निर्जला व्रत रखती हैं।

अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

पति की दीर्घायु सुनिश्चित होती है, वैवाहिक बंधन मजबूत होता है, विवाह में समृद्धि और खुशी आती है, पारिवारिक मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

विधि

सूर्योदय से पहले सरगी का भोजन। पूरे दिन निर्जला व्रत। शाम को परिवार की सभी विवाहित महिलाओं के साथ करवा चौथ पूजा करें। करवा चौथ व्रत कथा सुनें। चंद्रोदय पर छलनी से चाँद देखें, फिर उसी से पति को देखें।

व्रत कब रखें

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी — वर्ष में एक निश्चित दिन (अक्टूबर/नवंबर)।

व्रत नियम

सूर्योदय से चंद्रोदय तक पूर्ण निर्जला व्रत (न भोजन, न पानी)। व्रत शुरू होने से पहले सरगी (भोर का भोजन)।

व्रत कैसे खोलें

चंद्रोदय के बाद चाँद दर्शन की रस्म के बाद पति पत्नी को पहला पानी और पहला निवाला देता है।

सामान्य प्रश्न

प्र.करवा चौथ क्या है?

करवा चौथ विवाहित हिंदू महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए रखा जाने वाला एक दिन का व्रत है। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (4वें दिन) को दीवाली से एक महीने पहले होता है। महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक पूर्ण निर्...

प्र.करवा चौथ के व्रत नियम क्या हैं?

सूर्योदय से चंद्रोदय तक पूर्ण निर्जला व्रत (न भोजन, न पानी)। व्रत शुरू होने से पहले सरगी (भोर का भोजन)।

प्र.करवा चौथ कब रखना चाहिए?

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी — वर्ष में एक निश्चित दिन (अक्टूबर/नवंबर)।

प्र.करवा चौथ के क्या लाभ हैं?

पति की दीर्घायु सुनिश्चित होती है, वैवाहिक बंधन मजबूत होता है, विवाह में समृद्धि और खुशी आती है, पारिवारिक मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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