वार्षिक व्रत — हिंदू पवित्र उपवास
हरतालिका तीज
संक्षिप्त परिचय
हरतालिका तीज विवाहित और अविवाहित दोनों महिलाओं द्वारा भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया (तीसरे दिन) को मनाई जाती है। नाम "हरत" (अपहरण) और "आलिका" (सखी) से आता है — पार्वती की सखी का संदर्भ जिसने उन्हें शिव के अलावा किसी और से विवाह होने से बचाने के लिए उनका अपहरण किया था।
अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
अविवाहित महिलाओं को अच्छा पति मिलता है, विवाहित महिलाओं के पति की दीर्घायु होती है, वैवाहिक सुख मिलता है।
विधि
24 घंटे का पूर्ण निर्जला व्रत। शिव और पार्वती की मिट्टी या रेत की मूर्तियाँ बनाएं। ताजे फूल और बेलपत्र से पूजा करें। रात भर हरतालिका तीज कथा सुनते हुए जागें।
व्रत कब रखें
भाद्रपद शुक्ल तृतीया — वर्ष में एक बार (अगस्त/सितंबर)।
व्रत नियम
पूर्ण निर्जला व्रत — 24 घंटे न पानी, न भोजन। अगले दिन सुबह की पूजा के बाद ही तोड़ें।
व्रत कैसे खोलें
अगली सुबह मिट्टी की मूर्तियों का विसर्जन और पूजा पूरी करने के बाद व्रत खोलें।
सामान्य प्रश्न
प्र.हरतालिका तीज क्या है?
हरतालिका तीज विवाहित और अविवाहित दोनों महिलाओं द्वारा भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया (तीसरे दिन) को मनाई जाती है। नाम "हरत" (अपहरण) और "आलिका" (सखी) से आता है — पार्वती की सखी का संदर्भ जिसने उन्हें शिव के अलावा किसी और से विवाह होने से बचाने के...
प्र.हरतालिका तीज के व्रत नियम क्या हैं?
पूर्ण निर्जला व्रत — 24 घंटे न पानी, न भोजन। अगले दिन सुबह की पूजा के बाद ही तोड़ें।
प्र.हरतालिका तीज कब रखना चाहिए?
भाद्रपद शुक्ल तृतीया — वर्ष में एक बार (अगस्त/सितंबर)।
प्र.हरतालिका तीज के क्या लाभ हैं?
अविवाहित महिलाओं को अच्छा पति मिलता है, विवाहित महिलाओं के पति की दीर्घायु होती है, वैवाहिक सुख मिलता है।