वार्षिक व्रत — हिंदू पवित्र उपवास
कार्तिगाई व्रत
संक्षिप्त परिचय
कार्तिगाई व्रत भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) — युद्ध और विजय के देव — को समर्पित एक पवित्र तमिल हिंदू आचरण है, जो तब मनाया जाता है जब चंद्रमा कृत्तिका (प्लेयडीज) नक्षत्र में होता है। सबसे प्रमुख उत्सव तमिल मास कार्तिगाई (नवंबर–दिसंबर) की पूर्णिमा को कार्तिगाई दीपम के रूप में मनाया जाता है, जब घरों और मंदिरों में दीपक जलाए जाते हैं।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
साहस और शत्रुओं पर विजय मिलती है, बाधाएं दूर होती हैं, आध्यात्मिक ज्ञान मिलता है, बच्चों की रक्षा होती है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
विधि
कार्तिगाई नक्षत्र के दिन व्रत रखें। शाम को घर के प्रवेश द्वार पर और तुलसी के पौधे के पास तेल के दीपक (विशेषकर तिल का तेल) जलाएं। मुरुगन मंदिर जाएं। वेल (भाला प्रतीक), फूल और फल चढ़ाएं। मुरुगन के नाम (स्कंद, षण्मुख, सुब्रह्मण्य) जपें।
व्रत कब रखें
प्रत्येक माह जब चंद्रमा कृत्तिका नक्षत्र में हो; सबसे भव्य पालन तमिल माह कार्तिगाई (नवंबर/दिसंबर) की पूर्णिमा को।
व्रत नियम
माँसाहारी भोजन, प्याज और लहसुन से बचें। फल और दूध की अनुमति। कुछ लोग कठोर एकल भोजन व्रत (फलाहार) रखते हैं। श्रद्धालु भक्त निर्जला व्रत भी रखते हैं।
व्रत कैसे खोलें
शाम की दीप प्रज्ज्वलन रस्म और मुरुगन पूजा के बाद व्रत खोलें। प्रसाद (पोंगल, फल या मीठे चावल) ग्रहण करें।
सामान्य प्रश्न
प्र.कार्तिगाई व्रत क्या है?
कार्तिगाई व्रत भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) — युद्ध और विजय के देव — को समर्पित एक पवित्र तमिल हिंदू आचरण है, जो तब मनाया जाता है जब चंद्रमा कृत्तिका (प्लेयडीज) नक्षत्र में होता है। सबसे प्रमुख उत्सव तमिल मास कार्तिगाई (नवंबर–दिसंबर) की पूर्णिमा को कार्त...
प्र.कार्तिगाई व्रत के व्रत नियम क्या हैं?
माँसाहारी भोजन, प्याज और लहसुन से बचें। फल और दूध की अनुमति। कुछ लोग कठोर एकल भोजन व्रत (फलाहार) रखते हैं। श्रद्धालु भक्त निर्जला व्रत भी रखते हैं।
प्र.कार्तिगाई व्रत कब रखना चाहिए?
प्रत्येक माह जब चंद्रमा कृत्तिका नक्षत्र में हो; सबसे भव्य पालन तमिल माह कार्तिगाई (नवंबर/दिसंबर) की पूर्णिमा को।
प्र.कार्तिगाई व्रत के क्या लाभ हैं?
साहस और शत्रुओं पर विजय मिलती है, बाधाएं दूर होती हैं, आध्यात्मिक ज्ञान मिलता है, बच्चों की रक्षा होती है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं।