एकादशी व्रत — हिंदू पवित्र उपवास
जया एकादशी व्रत
संक्षिप्त परिचय
जया एकादशी माघ मास (जनवरी–फरवरी) की शुक्ल पक्ष एकादशी को पड़ती है। यह प्रेत योनि में फँसी आत्माओं को मुक्ति दिलाती है और उन्हें मोक्ष प्रदान करती है। "जया" का अर्थ विजय है, और यह व्रत पापों तथा जन्म-मृत्यु के चक्र पर विजय दिलाता है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
प्रेत योनि में फँसे पूर्वजों को मुक्ति मिलती है, मोक्ष प्राप्त होता है, शत्रुओं और बाधाओं पर विजय मिलती है, सभी जन्मों के पाप नष्ट होते हैं, और भगवान विष्णु की दिव्य सुरक्षा प्राप्त होती है।
विधि
दशमी शाम को सात्विक भोजन करें और व्रत का संकल्प लें। एकादशी पर सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। तुलसी, फूल, धूप और घी का दीप अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम और जया एकादशी कथा का पाठ करें। रात भर हरि नाम का जाप करते हुए जागें। द्वादशी सुबह पूजा पूरी करें और व्रत खोलें।
व्रत कब रखें
माघ मास (जनवरी–फरवरी) की शुक्ल पक्ष एकादशी। वर्ष में एक बार आती है — उसी शुभ माघ मास में जब प्रयागराज में पवित्र स्नान भी विशेष पुण्यकारी होता है।
व्रत नियम
अनाज, दाल, प्याज, लहसुन और माँसाहारी भोजन से पूर्ण परहेज करें। निर्जला (जलरहित) व्रत से अधिकतम पुण्य मिलता है। जो निर्जला न कर सकें उनके लिए फलाहार — फल, दूध, मेवे और सेंधा नमक — स्वीकार्य है।
व्रत कैसे खोलें
द्वादशी की सुबह सूर्योदय के बाद व्रत खोलें। तुलसी को जल अर्पित करें, संक्षिप्त विष्णु पूजा करें और प्रसाद ग्रहण करें। फल या दूध से बनी मिठाइयों से हल्का सात्विक भोजन शुरू करें।
सामान्य प्रश्न
प्र.जया एकादशी व्रत क्या है?
जया एकादशी माघ मास (जनवरी–फरवरी) की शुक्ल पक्ष एकादशी को पड़ती है। यह प्रेत योनि में फँसी आत्माओं को मुक्ति दिलाती है और उन्हें मोक्ष प्रदान करती है। "जया" का अर्थ विजय है, और यह व्रत पापों तथा जन्म-मृत्यु के चक्र पर विजय दिलाता है।
प्र.जया एकादशी व्रत के व्रत नियम क्या हैं?
अनाज, दाल, प्याज, लहसुन और माँसाहारी भोजन से पूर्ण परहेज करें। निर्जला (जलरहित) व्रत से अधिकतम पुण्य मिलता है। जो निर्जला न कर सकें उनके लिए फलाहार — फल, दूध, मेवे और सेंधा नमक — स्वीकार्य है।
प्र.जया एकादशी व्रत कब रखना चाहिए?
माघ मास (जनवरी–फरवरी) की शुक्ल पक्ष एकादशी। वर्ष में एक बार आती है — उसी शुभ माघ मास में जब प्रयागराज में पवित्र स्नान भी विशेष पुण्यकारी होता है।
प्र.जया एकादशी व्रत के क्या लाभ हैं?
प्रेत योनि में फँसे पूर्वजों को मुक्ति मिलती है, मोक्ष प्राप्त होता है, शत्रुओं और बाधाओं पर विजय मिलती है, सभी जन्मों के पाप नष्ट होते हैं, और भगवान विष्णु की दिव्य सुरक्षा प्राप्त होती है।