एकादशी व्रत — हिंदू पवित्र उपवास
गीता जयंती व्रत
संक्षिप्त परिचय
गीता जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है — वही एकादशी जिस दिन भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था। भक्त व्रत रखते हैं और पूरे दिन भगवद्गीता पढ़ने, पाठ करने या सुनने में बिताते हैं। मार्गशीर्ष मास को कृष्ण ने स्वयं गीता में विशेष घोषित किया है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
इस दिन गीता पाठ करने से सभी वेदों के अध्ययन के समतुल्य मोक्ष मिलता है, अज्ञान और भ्रम दूर होते हैं, कृष्ण की दिव्य कृपा प्राप्त होती है, मन शुद्ध होता है और वर्ष भर के लिए आध्यात्मिक ज्ञान मिलता है।
विधि
दशमी की शाम से एकादशी व्रत आरंभ करें। गीता जयंती की सुबह स्नान करें और स्वच्छ वेदी पर भगवद्गीता स्थापित करें। भगवान कृष्ण को फूल, तुलसी और दीपक अर्पित करें। पूरी भगवद्गीता या प्रमुख अध्याय (अ. 2, 9, 15, 18) पढ़ें या पाठ करें। गीता पाठ या प्रवचन में भाग लें। रात भर गीता श्लोकों का मनन करते हुए जागें।
व्रत कब रखें
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी — नवंबर या दिसंबर में होती है। एक वार्षिक पालन जो भगवद्गीता के प्रकट होने के दिन का स्मरण कराता है।
व्रत नियम
मानक एकादशी उपवास नियमों का पालन करें: चावल, गेहूँ, दाल, प्याज और लहसुन से बचें। फलाहार या निर्जला व्रत। प्राथमिक पालन आध्यात्मिक है — कड़े भोजन नियमों से अधिक महत्वपूर्ण गीता पाठ है।
व्रत कैसे खोलें
द्वादशी पर सूर्योदय के बाद प्रसाद — तुलसी जल, फल और कृष्ण को अर्पित मिठाई — से व्रत खोलें। यदि संभव हो तो भगवद्गीता की एक प्रति दान करें।
सामान्य प्रश्न
प्र.गीता जयंती व्रत क्या है?
गीता जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है — वही एकादशी जिस दिन भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था। भक्त व्रत रखते हैं और पूरे दिन भगवद्गीता पढ़ने, पाठ करने या सुनने में बिताते हैं। मार्गशीर्ष ...
प्र.गीता जयंती व्रत के व्रत नियम क्या हैं?
मानक एकादशी उपवास नियमों का पालन करें: चावल, गेहूँ, दाल, प्याज और लहसुन से बचें। फलाहार या निर्जला व्रत। प्राथमिक पालन आध्यात्मिक है — कड़े भोजन नियमों से अधिक महत्वपूर्ण गीता पाठ है।
प्र.गीता जयंती व्रत कब रखना चाहिए?
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी — नवंबर या दिसंबर में होती है। एक वार्षिक पालन जो भगवद्गीता के प्रकट होने के दिन का स्मरण कराता है।
प्र.गीता जयंती व्रत के क्या लाभ हैं?
इस दिन गीता पाठ करने से सभी वेदों के अध्ययन के समतुल्य मोक्ष मिलता है, अज्ञान और भ्रम दूर होते हैं, कृष्ण की दिव्य कृपा प्राप्त होती है, मन शुद्ध होता है और वर्ष भर के लिए आध्यात्मिक ज्ञान मिलता है।