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एकादशी व्रत — हिंदू पवित्र उपवास

अपरा एकादशी व्रत

देवता भगवान विष्णु (त्रिविक्रम)
प्रकार एकादशी व्रत

संक्षिप्त परिचय

अपरा एकादशी ज्येष्ठ मास (मई–जून) की कृष्ण पक्ष एकादशी को पड़ती है। "अपरा" का अर्थ है असीमित या अनंत — यह इस व्रत से मिलने वाले अनंत पुण्य को दर्शाता है। ब्रह्म पुराण के अनुसार यह झूठी गवाही, कर्तव्य परित्याग और ब्रह्महत्या से उत्पन्न पापों को नष्ट करती है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

झूठी गवाही और कर्तव्य परित्याग के पापों का नाश होता है, खोया हुआ यश और सम्मान वापस मिलता है, अनंत आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता है, पितृ-श्राप दूर होते हैं।

विधि

दशमी शाम को संकल्प से शुरुआत करें। एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त में उठें और नदी में या तिल-मिश्रित जल से स्नान करें। सफेद और पीले फूलों से विष्णु के त्रिविक्रम स्वरूप की पूजा करें। अपरा एकादशी कथा और विष्णु स्तोत्र का पाठ करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और सोने या अन्न का दान करें। पूरे दिन मौन या न्यूनतम वाणी बनाए रखें।

व्रत कब रखें

ज्येष्ठ मास (मई–जून) की कृष्ण पक्ष एकादशी। ग्रीष्म ऋतु के गर्म ज्येष्ठ मास में पड़ती है जब शारीरिक कठिनाई के कारण उपवास विशेष रूप से पुण्यकारी होता है।

व्रत नियम

अनाज और माँसाहारी भोजन से पूर्ण परहेज। नमक से बचें (या केवल सेंधा नमक उपयोग करें)। क्रोध, वासना और लोभ से सख्त परहेज क्योंकि ये व्रत का पुण्य नष्ट करते हैं। फल, दूध, नारियल पानी और मेवे की अनुमति है।

व्रत कैसे खोलें

द्वादशी की सुबह सूर्योदय पूजा के बाद व्रत खोलें। खाने से पहले तुलसी और सूर्य को जल अर्पित करें। जरूरतमंदों को भोजन दान करें। आँवला, तिल या जौ से भोजन शुरू करें — ये द्वादशी के लिए उपयुक्त हैं।

सामान्य प्रश्न

प्र.अपरा एकादशी व्रत क्या है?

अपरा एकादशी ज्येष्ठ मास (मई–जून) की कृष्ण पक्ष एकादशी को पड़ती है। "अपरा" का अर्थ है असीमित या अनंत — यह इस व्रत से मिलने वाले अनंत पुण्य को दर्शाता है। ब्रह्म पुराण के अनुसार यह झूठी गवाही, कर्तव्य परित्याग और ब्रह्महत्या से उत्पन्न पापों को नष्ट कर...

प्र.अपरा एकादशी व्रत के व्रत नियम क्या हैं?

अनाज और माँसाहारी भोजन से पूर्ण परहेज। नमक से बचें (या केवल सेंधा नमक उपयोग करें)। क्रोध, वासना और लोभ से सख्त परहेज क्योंकि ये व्रत का पुण्य नष्ट करते हैं। फल, दूध, नारियल पानी और मेवे की अनुमति है।

प्र.अपरा एकादशी व्रत कब रखना चाहिए?

ज्येष्ठ मास (मई–जून) की कृष्ण पक्ष एकादशी। ग्रीष्म ऋतु के गर्म ज्येष्ठ मास में पड़ती है जब शारीरिक कठिनाई के कारण उपवास विशेष रूप से पुण्यकारी होता है।

प्र.अपरा एकादशी व्रत के क्या लाभ हैं?

झूठी गवाही और कर्तव्य परित्याग के पापों का नाश होता है, खोया हुआ यश और सम्मान वापस मिलता है, अनंत आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता है, पितृ-श्राप दूर होते हैं।

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