एकादशी व्रत — हिंदू पवित्र उपवास
अन्नदा एकादशी व्रत
संक्षिप्त परिचय
अन्नदा एकादशी भाद्रपद माह (अगस्त–सितंबर) की कृष्ण पक्ष एकादशी को पड़ती है। "अन्नदा" का अर्थ है "अन्न/अनाज देने वाली," और यह एकादशी अन्नदान — भूखों को भोजन दान — से दृढ़ता से जुड़ी है, जिसे हिंदू धर्म में सबसे महान दान का रूप माना जाता है। ब्रह्म वैवर्त पुराण में भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया कि इस एकादशी का पालन करने से निचले लोकों में फंसे पूर्वजों को मुक्ति मिलती है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
पूर्वजों को निचले लोकों से मुक्ति मिलती है, अन्नदान के माध्यम से अपार पुण्य मिलता है, व्रती और उनके वंश के पाप नष्ट होते हैं, समृद्धि और प्रचुरता सुनिश्चित होती है, और भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है।
विधि
एकादशी पर व्रत रखें और उदारतापूर्वक भोजन दान करें — यह अन्नदा एकादशी पालन का केंद्रीय कार्य है। सुबह तुलसी, फूल और धूप से भगवान विष्णु की पूजा करें। अन्नदा एकादशी कथा पढ़ें। पूर्वजों के लिए तर्पण (जल अर्पण) करें। शाम को दीपक पूजा करें और रात भर विष्णु नाम जपते हुए जागें।
व्रत कब रखें
भाद्रपद माह (अगस्त–सितंबर) की कृष्ण पक्ष एकादशी। वर्ष में एक बार आती है।
व्रत नियम
चावल, अनाज, दाल, प्याज, लहसुन और माँसाहारी भोजन से बचें। हालांकि यह एकादशी भोजन दान के बारे में है, व्रती को स्वयं उपवास रखना चाहिए। फलाहार या निर्जला व्रत मानक है।
व्रत कैसे खोलें
द्वादशी पर सूर्योदय के बाद व्रत खोलें। खाने से पहले कम से कम एक जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन दान करें — यह अन्नदा एकादशी के मूल उद्देश्य को पूरा करता है। फिर विष्णु पूजा करें और प्रसाद ग्रहण करें।
सामान्य प्रश्न
प्र.अन्नदा एकादशी व्रत क्या है?
अन्नदा एकादशी भाद्रपद माह (अगस्त–सितंबर) की कृष्ण पक्ष एकादशी को पड़ती है। "अन्नदा" का अर्थ है "अन्न/अनाज देने वाली," और यह एकादशी अन्नदान — भूखों को भोजन दान — से दृढ़ता से जुड़ी है, जिसे हिंदू धर्म में सबसे महान दान का रूप माना जाता है। ब्रह्म वैवर...
प्र.अन्नदा एकादशी व्रत के व्रत नियम क्या हैं?
चावल, अनाज, दाल, प्याज, लहसुन और माँसाहारी भोजन से बचें। हालांकि यह एकादशी भोजन दान के बारे में है, व्रती को स्वयं उपवास रखना चाहिए। फलाहार या निर्जला व्रत मानक है।
प्र.अन्नदा एकादशी व्रत कब रखना चाहिए?
भाद्रपद माह (अगस्त–सितंबर) की कृष्ण पक्ष एकादशी। वर्ष में एक बार आती है।
प्र.अन्नदा एकादशी व्रत के क्या लाभ हैं?
पूर्वजों को निचले लोकों से मुक्ति मिलती है, अन्नदान के माध्यम से अपार पुण्य मिलता है, व्रती और उनके वंश के पाप नष्ट होते हैं, समृद्धि और प्रचुरता सुनिश्चित होती है, और भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है।