वार्षिक व्रत — हिंदू पवित्र उपवास
अनंत चतुर्दशी व्रत
संक्षिप्त परिचय
अनंत चतुर्दशी व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी (14वें दिन) को मनाया जाता है और भगवान विष्णु के अनंत — अनंत सर्प (शेष नाग) — रूप को समर्पित है। भक्त पूजा के बाद दाहिनी कलाई पर 14 गाँठों वाला पवित्र धागा (अनंत सूत्र) बाँधते हैं, जो विष्णु की अनंत सुरक्षा का प्रतीक है। यह दिन 10 दिवसीय गणेश चतुर्थी उत्सव के बाद गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का दिन भी है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
विष्णु का अनंत आशीर्वाद मिलता है, सभी ऋण और आर्थिक कठिनाइयाँ दूर होती हैं, सभी प्रयासों में सफलता मिलती है, दीर्घायु मिलती है, पिछले पापों के प्रभाव दूर होते हैं।
विधि
व्रत रखें। अनंत सूत्र (हल्दी या कुमकुम से रँगा 14 गाँठों वाला धागा) तैयार करें या खरीदें। पंचामृत अभिषेक से भगवान विष्णु (अनंत रूप) की पूजा करें। अनंत चतुर्दशी व्रत मंत्र का जाप करते हुए दाहिनी कलाई पर अनंत सूत्र बाँधें। पुरुष दाईं कलाई पर, महिलाएं बाईं पर बाँधें।
व्रत कब रखें
भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी — वर्ष में एक बार (अगस्त/सितंबर), गणेश प्रतिमा विसर्जन का दिन भी।
व्रत नियम
अनाज, प्याज, लहसुन से बचें। फलाहार (फल, दूध, साबूदाना) मानक व्रत है। कुछ लोग निर्जला रखते हैं। पूर्ण लाभ के लिए व्रत 14 वर्षों तक लगातार रखना चाहिए।
व्रत कैसे खोलें
अनंत सूत्र बाँधने और पूजा पूरी करने के बाद व्रत खोलें। सात्विक प्रसाद ग्रहण करें।
सामान्य प्रश्न
प्र.अनंत चतुर्दशी व्रत क्या है?
अनंत चतुर्दशी व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी (14वें दिन) को मनाया जाता है और भगवान विष्णु के अनंत — अनंत सर्प (शेष नाग) — रूप को समर्पित है। भक्त पूजा के बाद दाहिनी कलाई पर 14 गाँठों वाला पवित्र धागा (अनंत सूत्र) बाँधते हैं, जो विष्णु की ...
प्र.अनंत चतुर्दशी व्रत के व्रत नियम क्या हैं?
अनाज, प्याज, लहसुन से बचें। फलाहार (फल, दूध, साबूदाना) मानक व्रत है। कुछ लोग निर्जला रखते हैं। पूर्ण लाभ के लिए व्रत 14 वर्षों तक लगातार रखना चाहिए।
प्र.अनंत चतुर्दशी व्रत कब रखना चाहिए?
भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी — वर्ष में एक बार (अगस्त/सितंबर), गणेश प्रतिमा विसर्जन का दिन भी।
प्र.अनंत चतुर्दशी व्रत के क्या लाभ हैं?
विष्णु का अनंत आशीर्वाद मिलता है, सभी ऋण और आर्थिक कठिनाइयाँ दूर होती हैं, सभी प्रयासों में सफलता मिलती है, दीर्घायु मिलती है, पिछले पापों के प्रभाव दूर होते हैं।