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वार्षिक व्रत — हिंदू पवित्र उपवास

अहोई अष्टमी व्रत

देवता अहोई माता (पार्वती का स्वरूप)
प्रकार वार्षिक व्रत

संक्षिप्त परिचय

अहोई अष्टमी एक व्रत है जो विशेष रूप से माताएं अपने बच्चों की दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए रखती हैं। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (8वें दिन) — दीवाली से आठ दिन पहले — होता है। माताएं सूर्योदय से शाम आकाश में तारे दिखने तक पूर्ण निर्जला व्रत रखती हैं।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

बच्चों की दीर्घायु और अच्छा स्वास्थ्य सुनिश्चित होता है, बच्चों के मार्ग की बाधाएं दूर होती हैं, पूरे परिवार को देवी पार्वती का आशीर्वाद मिलता है, बच्चों की सफलता के लिए माँ की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

विधि

सूर्योदय से पूर्ण उपवास रखें। दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाएं या लगाएं (पारंपरिक रूप से सात पुत्रों के साथ चित्रित)। शाम को अन्य महिलाओं के साथ एकत्र होकर फूल, रोली और चावल से अहोई माता की पूजा करें। अहोई अष्टमी व्रत कथा सुनें। संध्या काल में तारे या (जहाँ दिखे) चंद्रमा देखकर व्रत तोड़ें।

व्रत कब रखें

कार्तिक कृष्ण अष्टमी — वर्ष में एक बार (अक्टूबर/नवंबर), दीवाली से आठ दिन पहले।

व्रत नियम

सूर्योदय से शाम तारे दिखने तक पूर्ण निर्जला व्रत (न भोजन, न पानी)। स्वास्थ्य कारणों से कुछ माताएं पानी की अनुमति देती हैं। माँसाहारी भोजन नहीं।

व्रत कैसे खोलें

शाम के तारे (या चंद्रमा) देखने के बाद व्रत खोलें। पति या सबसे बड़ा बच्चा पहला जल देता है। पहले प्रसाद (खीर या मिठाई) ग्रहण करें।

सामान्य प्रश्न

प्र.अहोई अष्टमी व्रत क्या है?

अहोई अष्टमी एक व्रत है जो विशेष रूप से माताएं अपने बच्चों की दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए रखती हैं। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (8वें दिन) — दीवाली से आठ दिन पहले — होता है। माताएं सूर्योदय से शाम आकाश में तारे दिखने तक पूर्ण निर्...

प्र.अहोई अष्टमी व्रत के व्रत नियम क्या हैं?

सूर्योदय से शाम तारे दिखने तक पूर्ण निर्जला व्रत (न भोजन, न पानी)। स्वास्थ्य कारणों से कुछ माताएं पानी की अनुमति देती हैं। माँसाहारी भोजन नहीं।

प्र.अहोई अष्टमी व्रत कब रखना चाहिए?

कार्तिक कृष्ण अष्टमी — वर्ष में एक बार (अक्टूबर/नवंबर), दीवाली से आठ दिन पहले।

प्र.अहोई अष्टमी व्रत के क्या लाभ हैं?

बच्चों की दीर्घायु और अच्छा स्वास्थ्य सुनिश्चित होता है, बच्चों के मार्ग की बाधाएं दूर होती हैं, पूरे परिवार को देवी पार्वती का आशीर्वाद मिलता है, बच्चों की सफलता के लिए माँ की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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