जीवन संस्कार — वैदिक पूजा विधि
विवाह पूजा
संक्षिप्त परिचय
विवाह पूजा हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कार है। यह दो आत्माओं का अग्नि देव के साक्षी में दिव्य मिलन है। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी से प्रेम, समृद्धि और संतान के लिए आशीर्वाद मांगा जाता है। इसमें गणेश पूजा, कन्यादान, वरमाला, सप्तपदी, सिंदूरदान और मंगलसूत्र संस्कार शामिल हैं।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
विवाह को दैवीय आशीर्वाद से पवित्र करता है, वैवाहिक सद्भाव और आजीवन साथ सुनिश्चित करता है, समृद्धि और संतान की कामना पूरी होती है, पारिवारिक और सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं।
चरण-दर-चरण विधि
गणेश पूजा और नवग्रह पूजा से आरंभ करें। कन्यादान — वधू के पिता वर के हाथ में कन्या का हाथ देते हैं। वरमाला का आदान-प्रदान करें। ग्रंथि बंधन (पवित्र गांठ) बांधें। सप्तपदी — सात वचनों के साथ पवित्र अग्नि के चारों ओर सात फेरे लें। सिंदूरदान और मंगलसूत्र पहनाएं। बुजुर्गों के आशीर्वाद और पूर्णाहुति से समापन करें।
शुभ मुहूर्त
दोनों कुंडलियों के आधार पर वैदिक ज्योतिषी द्वारा निर्धारित शुभ मुहूर्त। पसंदीदा माह: माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ। अधिक मास और पितृ पक्ष से बचें।
आवश्यक सामग्री
- ·पवित्र अग्नि (हवन कुंड)
- ·घी
- ·सामग्री (हवन जड़ी-बूटियां)
- ·फूल और माला
- ·नारियल
- ·पान और सुपारी
- ·सिंदूर
- ·मंगलसूत्र
- ·नए वस्त्र
- ·चावल
- ·अगरबत्ती
- ·कपूर
सामान्य प्रश्न
प्र.विवाह पूजा क्या है?
विवाह पूजा हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कार है। यह दो आत्माओं का अग्नि देव के साक्षी में दिव्य मिलन है। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी से प्रेम, समृद्धि और संतान के लिए आशीर्वाद मांगा जाता है। इसमें गणेश पूजा, कन्यादान, वरमा...
प्र.विवाह पूजा के क्या लाभ हैं?
विवाह को दैवीय आशीर्वाद से पवित्र करता है, वैवाहिक सद्भाव और आजीवन साथ सुनिश्चित करता है, समृद्धि और संतान की कामना पूरी होती है, पारिवारिक और सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं।
प्र.विवाह पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
दोनों कुंडलियों के आधार पर वैदिक ज्योतिषी द्वारा निर्धारित शुभ मुहूर्त। पसंदीदा माह: माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ। अधिक मास और पितृ पक्ष से बचें।
प्र.विवाह पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
पवित्र अग्नि (हवन कुंड), घी, सामग्री (हवन जड़ी-बूटियां), फूल और माला, नारियल, पान और सुपारी, सिंदूर, मंगलसूत्र, नए वस्त्र, चावल, अगरबत्ती, कपूर।