जीवन संस्कार — वैदिक पूजा विधि
अन्नप्राशन संस्कार
संक्षिप्त परिचय
अन्नप्राशन संस्कार शिशु के जीवन का एक महत्वपूर्ण संस्कार है, जब पहली बार ठोस आहार दिया जाता है — सामान्यतः लड़कों को 6 महीने और लड़कियों को 5 या 7 महीने की आयु में। यह सोलह संस्कारों में से एक है। इस संस्कार में अन्नपूर्णा देवी और भगवान विष्णु की पूजा के बाद पिता या वरिष्ठ परिजन शिशु को पहली बार चावल या खीर चखाते हैं।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
शिशु के शारीरिक विकास और पाचन शक्ति को सुनिश्चित करता है, आजीवन पोषण के लिए आशीर्वाद मिलता है, बच्चे के स्वास्थ्य की बाधाएं दूर होती हैं और परिवार तथा पोषण की दैवीय शक्तियों के बीच संबंध मजबूत होता है।
चरण-दर-चरण विधि
अन्नपूर्णा देवी और भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। सबसे पहले गणेश पूजा करें। अन्नप्राशन मंत्रों का उच्चारण करें और आशीर्वाद प्राप्त करें। खीर या पका हुआ चावल तैयार करें। पिता या वरिष्ठ परिजन शिशु को पहला कौर खिलाएं। परिवारजन आशीर्वाद और उपहार दें। आरती और प्रसाद वितरण से समापन करें।
शुभ मुहूर्त
शिशु की जन्म कुंडली के अनुसार शुभ मुहूर्त। सामान्यतः 5वें, 6वें या 7वें माह में। अमावस्या और अशुभ तिथियों से बचें।
आवश्यक सामग्री
- ·खीर या पका हुआ चावल
- ·चांदी या सोने का चम्मच
- ·अन्नपूर्णा देवी चित्र
- ·विष्णु प्रतिमा या चित्र
- ·घी
- ·शहद
- ·अगरबत्ती
- ·फूल
- ·कपूर
- ·शिशु के लिए नए वस्त्र
सामान्य प्रश्न
प्र.अन्नप्राशन संस्कार क्या है?
अन्नप्राशन संस्कार शिशु के जीवन का एक महत्वपूर्ण संस्कार है, जब पहली बार ठोस आहार दिया जाता है — सामान्यतः लड़कों को 6 महीने और लड़कियों को 5 या 7 महीने की आयु में। यह सोलह संस्कारों में से एक है। इस संस्कार में अन्नपूर्णा देवी और भगवान विष्णु की पूज...
प्र.अन्नप्राशन संस्कार के क्या लाभ हैं?
शिशु के शारीरिक विकास और पाचन शक्ति को सुनिश्चित करता है, आजीवन पोषण के लिए आशीर्वाद मिलता है, बच्चे के स्वास्थ्य की बाधाएं दूर होती हैं और परिवार तथा पोषण की दैवीय शक्तियों के बीच संबंध मजबूत होता है।
प्र.अन्नप्राशन संस्कार का सबसे अच्छा समय क्या है?
शिशु की जन्म कुंडली के अनुसार शुभ मुहूर्त। सामान्यतः 5वें, 6वें या 7वें माह में। अमावस्या और अशुभ तिथियों से बचें।
प्र.अन्नप्राशन संस्कार के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
खीर या पका हुआ चावल, चांदी या सोने का चम्मच, अन्नपूर्णा देवी चित्र, विष्णु प्रतिमा या चित्र, घी, शहद, अगरबत्ती, फूल, कपूर, शिशु के लिए नए वस्त्र।