जीवन संस्कार — वैदिक पूजा विधि
मुंडन (चूड़ाकर्म) संस्कार
संक्षिप्त परिचय
मुंडन (चूड़ाकर्म) सोलह संस्कारों में से एक है — 1 से 3 वर्ष की आयु में बच्चे का पहला बाल कटवाने का पवित्र हिंदू संस्कार। इस समारोह में जन्म की अशुद्धियों को दूर करने और बच्चे के बौद्धिक व शारीरिक विकास को बढ़ावा देने के लिए पहली बार सिर मुंडाया जाता है। इसमें हवन, कुल देवता की प्रार्थना और मुंडे हुए सिर पर चंदन का लेप लगाना शामिल है।
अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
जन्म की अशुद्धियां दूर होती हैं, स्वस्थ बालों का विकास होता है, बौद्धिक विकास को बढ़ावा मिलता है, पूर्वजों के आशीर्वाद से जुड़ाव होता है।
चरण-दर-चरण विधि
शुभ मुहूर्त चुनें। गणेश पूजा करें। कुल देवता का आवाहन करें। पिता बच्चे को पकड़े जबकि नाई निर्धारित तरीके से शिखा छोड़कर सिर मुंडाएं। बाल पवित्र नदी में प्रवाहित करें। चंदन का लेप लगाएं। हवन करें।
शुभ मुहूर्त
विषम वर्ष (1, 3 या 5 वर्ष की आयु)। पुष्य, रोहिणी, हस्त जैसे शुभ नक्षत्र। बच्चे के जन्म माह और अशुभ नक्षत्रों से बचें।
आवश्यक सामग्री
- ·नया उस्तरा/कैंची
- ·चंदन का लेप
- ·हल्दी
- ·हवन सामग्री
- ·कलश
- ·मौली
- ·फूल
- ·बच्चे के नए कपड़े
सामान्य प्रश्न
प्र.मुंडन (चूड़ाकर्म) संस्कार क्या है?
मुंडन (चूड़ाकर्म) सोलह संस्कारों में से एक है — 1 से 3 वर्ष की आयु में बच्चे का पहला बाल कटवाने का पवित्र हिंदू संस्कार। इस समारोह में जन्म की अशुद्धियों को दूर करने और बच्चे के बौद्धिक व शारीरिक विकास को बढ़ावा देने के लिए पहली बार सिर मुंडाया जाता ...
प्र.मुंडन (चूड़ाकर्म) संस्कार के क्या लाभ हैं?
जन्म की अशुद्धियां दूर होती हैं, स्वस्थ बालों का विकास होता है, बौद्धिक विकास को बढ़ावा मिलता है, पूर्वजों के आशीर्वाद से जुड़ाव होता है।
प्र.मुंडन (चूड़ाकर्म) संस्कार का सबसे अच्छा समय क्या है?
विषम वर्ष (1, 3 या 5 वर्ष की आयु)। पुष्य, रोहिणी, हस्त जैसे शुभ नक्षत्र। बच्चे के जन्म माह और अशुभ नक्षत्रों से बचें।
प्र.मुंडन (चूड़ाकर्म) संस्कार के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
नया उस्तरा/कैंची, चंदन का लेप, हल्दी, हवन सामग्री, कलश, मौली, फूल, बच्चे के नए कपड़े।