जीवन संस्कार — वैदिक पूजा विधि
सीमन्तोन्नयन संस्कार
संक्षिप्त परिचय
सीमन्तोन्नयन सोलह वैदिक संस्कारों में से एक है जो गर्भावस्था के सातवें या आठवें माह में अजन्मे शिशु को आशीर्वाद देने और माता की रक्षा के लिए किया जाता है। इस अनुष्ठान में वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ साही की सुई या उदुम्बर की शाखा से गर्भवती माता की मांग भरी जाती है। यह संस्कार शिशु के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने, दुष्टात्माओं को दूर करने और महत्वपूर्ण अंतिम तिमाही में माता के मन को शांत करने के लिए होता है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
अजन्मे शिशु की नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा होती है, शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास स्वस्थ रहता है, माता शांत रहती है और गर्भावस्था की चिंता कम होती है, सुरक्षित प्रसव के लिए दिव्य आशीर्वाद मिलता है।
चरण-दर-चरण विधि
गर्भावस्था के 7वें या 8वें माह में शुभ दिन पर करें। विष्णु और लक्ष्मी की प्रतिमाओं के साथ वेदी स्थापित करें। पति गृह्यसूत्रों के सीमन्तोन्नयन मंत्र पढ़ते हुए साही की सुई या उदुम्बर की शाखा से तीन बार पत्नी की मांग भरें। फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। परिवार के सदस्य होने वाली माँ को आशीर्वाद दें। आरती और भोज से समाप्त करें।
शुभ मुहूर्त
गर्भावस्था के सातवें या आठवें महीने में शुभ तिथि को। अमावस्या और अशुभ नक्षत्रों से बचें। सूर्योदय के बाद सुबह के समय सर्वोत्तम।
आवश्यक सामग्री
- ·विष्णु और लक्ष्मी की प्रतिमाएं
- ·साही की सुई या उदुम्बर शाखा
- ·फूल (चमेली, गेंदा)
- ·फल
- ·मिठाई
- ·होने वाली माँ के लिए नई साड़ी
- ·घी का दीपक
- ·अगरबत्ती
- ·नारियल
- ·सिंदूर
सामान्य प्रश्न
प्र.सीमन्तोन्नयन संस्कार क्या है?
सीमन्तोन्नयन सोलह वैदिक संस्कारों में से एक है जो गर्भावस्था के सातवें या आठवें माह में अजन्मे शिशु को आशीर्वाद देने और माता की रक्षा के लिए किया जाता है। इस अनुष्ठान में वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ साही की सुई या उदुम्बर की शाखा से गर्भवती माता ...
प्र.सीमन्तोन्नयन संस्कार के क्या लाभ हैं?
अजन्मे शिशु की नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा होती है, शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास स्वस्थ रहता है, माता शांत रहती है और गर्भावस्था की चिंता कम होती है, सुरक्षित प्रसव के लिए दिव्य आशीर्वाद मिलता है।
प्र.सीमन्तोन्नयन संस्कार का सबसे अच्छा समय क्या है?
गर्भावस्था के सातवें या आठवें महीने में शुभ तिथि को। अमावस्या और अशुभ नक्षत्रों से बचें। सूर्योदय के बाद सुबह के समय सर्वोत्तम।
प्र.सीमन्तोन्नयन संस्कार के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
विष्णु और लक्ष्मी की प्रतिमाएं, साही की सुई या उदुम्बर शाखा, फूल (चमेली, गेंदा), फल, मिठाई, होने वाली माँ के लिए नई साड़ी, घी का दीपक, अगरबत्ती, नारियल, सिंदूर।