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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

जीवन संस्कार — वैदिक पूजा विधि

उपनयन संस्कार (जनेऊ संस्कार)

देवता भगवान ब्रह्मा, सावित्री देवी और भगवान विष्णु
अवधि 3–4 घंटे
श्रेणी जीवन संस्कार

संक्षिप्त परिचय

उपनयन संस्कार (जनेऊ संस्कार) बालक के वैदिक विद्या और ब्रह्मचर्य आश्रम में प्रवेश का पवित्र संस्कार है। यह सोलह संस्कारों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है। इसमें पवित्र यज्ञोपवीत (तीन धागों वाला जनेऊ) बाएं कंधे पर धारण कराया जाता है, पिता या गुरु गायत्री मंत्र की दीक्षा देते हैं और प्रतीकात्मक मुंडन किया जाता है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

बालक के द्विज (दूसरे जन्म) की घोषणा होती है, अनुशासन और आध्यात्मिक जागरूकता आती है, वैदिक ज्ञान की दीक्षा मिलती है, गायत्री मंत्र से आजीवन जुड़ाव होता है और शैक्षणिक व आध्यात्मिक उत्कर्ष के लिए आशीर्वाद मिलता है।

चरण-दर-चरण विधि

गणेश पूजा और नवग्रह पूजा से आरंभ करें। बालक का प्रतीकात्मक मुंडन करें। ब्रह्मा, सावित्री और विष्णु के आवाहन के साथ हवन करें। पिता या पुरोहित बालक के बाएं कंधे पर यज्ञोपवीत धारण कराएं। पिता पहली बार बालक के दाएं कान में गायत्री मंत्र का उपदेश दें। बालक ब्रह्मचर्य के व्रत लें। ब्राह्मण भोज और परिवार के आशीर्वाद से समापन करें।

शुभ मुहूर्त

वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुभ मुहूर्त। परंपरागत रूप से 7–16 वर्ष की आयु में। पसंदीदा माह: माघ, फाल्गुन, वैशाख। श्राद्ध पक्ष से बचें।

आवश्यक सामग्री

  • ·यज्ञोपवीत (जनेऊ)
  • ·हवन कुंड
  • ·घी
  • ·सामग्री
  • ·बालक के लिए नई सफेद धोती
  • ·आम की लकड़ी
  • ·नारियल
  • ·शहद
  • ·दही
  • ·फूल
  • ·अगरबत्ती
  • ·कपूर

सामान्य प्रश्न

प्र.उपनयन संस्कार (जनेऊ संस्कार) क्या है?

उपनयन संस्कार (जनेऊ संस्कार) बालक के वैदिक विद्या और ब्रह्मचर्य आश्रम में प्रवेश का पवित्र संस्कार है। यह सोलह संस्कारों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है। इसमें पवित्र यज्ञोपवीत (तीन धागों वाला जनेऊ) बाएं कंधे पर धारण कराया जाता है, पिता या गुर...

प्र.उपनयन संस्कार (जनेऊ संस्कार) के क्या लाभ हैं?

बालक के द्विज (दूसरे जन्म) की घोषणा होती है, अनुशासन और आध्यात्मिक जागरूकता आती है, वैदिक ज्ञान की दीक्षा मिलती है, गायत्री मंत्र से आजीवन जुड़ाव होता है और शैक्षणिक व आध्यात्मिक उत्कर्ष के लिए आशीर्वाद मिलता है।

प्र.उपनयन संस्कार (जनेऊ संस्कार) का सबसे अच्छा समय क्या है?

वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुभ मुहूर्त। परंपरागत रूप से 7–16 वर्ष की आयु में। पसंदीदा माह: माघ, फाल्गुन, वैशाख। श्राद्ध पक्ष से बचें।

प्र.उपनयन संस्कार (जनेऊ संस्कार) के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

यज्ञोपवीत (जनेऊ), हवन कुंड, घी, सामग्री, बालक के लिए नई सफेद धोती, आम की लकड़ी, नारियल, शहद, दही, फूल, अगरबत्ती, कपूर।

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