एकादशी व्रत — हिंदू पवित्र उपवास
षट्तिला एकादशी व्रत
संक्षिप्त परिचय
षट्तिला एकादशी माघ मास (जनवरी–फरवरी) की कृष्ण एकादशी को पड़ती है। नाम "षट्" (छह) और "तिला" (तिल) से आता है, जो इस आचरण में तिल के उपयोग के छह तरीकों को दर्शाता है: तिल मिले पानी में स्नान, शरीर पर तिल का लेप, होम में तिल अर्पण, तिल जल पीना, तिल खाना, और ब्राह्मणों को तिल दान। भविष्य पुराण में एक भक्त महिला की कथा है जिसने महान तपस्या की थी लेकिन कभी दूसरों को भोजन दान नहीं किया था।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
तिल के पवित्र उपयोग से शरीर और आत्मा की शुद्धि होती है, पूर्वजों की मुक्ति सुनिश्चित होती है, लालच और न-देने के पापों को दूर करता है, मृत्यु के बाद भक्त को विष्णु का लोक मिलता है, त्वचा रोगों और शारीरिक अशुद्धियों से राहत मिलती है।
विधि
इस एकादशी में एक अनोखा छह-गुना तिल अनुष्ठान है: (1) स्नान के पानी में तिल मिलाकर स्नान करें। (2) स्नान से पहले तिल और पानी का लेप शरीर पर लगाएं। (3) "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" जपते हुए एक छोटा तिल होम करें। (4) तिल मिश्रित पानी का एक छोटा कप पीएं। (5) फलाहार के हिस्से के रूप में तिल या तिल लड्डू खाएं। (6) ब्राह्मणों या गरीबों को उदारतापूर्वक तिल दान करें।
व्रत कब रखें
माघ कृष्ण एकादशी — वर्ष में एक बार (जनवरी/फरवरी)। माघ मास के दौरान पड़ती है, जो स्वयं पवित्र नदियों में स्नान (माघ स्नान) और तिल संबंधी दान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
व्रत नियम
चावल, अनाज, दाल, प्याज, लहसुन या माँस नहीं। अनुमत रूपों में तिल (तिल जल, तिल लड्डू) न केवल अनुमत है बल्कि विशेष रूप से निर्धारित है। फलाहार मानक है; निर्जला वैकल्पिक है लेकिन अत्यधिक पुण्यकारी है। तिल दान न छोड़ें — इसे व्रत जितना ही आवश्यक माना जाता है।
व्रत कैसे खोलें
द्वादशी पर, यदि कोई छूट गई हो तो सभी छह तिल क्रियाएं पूरी करें। खाने से पहले विष्णु की पूजा करें और उदारतापूर्वक तिल दान करें। तिल आधारित मिठाइयों (तिल लड्डू, तिल चिक्की) या साधारण फलाहार से व्रत खोलें।
सामान्य प्रश्न
प्र.षट्तिला एकादशी व्रत क्या है?
षट्तिला एकादशी माघ मास (जनवरी–फरवरी) की कृष्ण एकादशी को पड़ती है। नाम "षट्" (छह) और "तिला" (तिल) से आता है, जो इस आचरण में तिल के उपयोग के छह तरीकों को दर्शाता है: तिल मिले पानी में स्नान, शरीर पर तिल का लेप, होम में तिल अर्पण, तिल जल पीना, तिल खाना,...
प्र.षट्तिला एकादशी व्रत के व्रत नियम क्या हैं?
चावल, अनाज, दाल, प्याज, लहसुन या माँस नहीं। अनुमत रूपों में तिल (तिल जल, तिल लड्डू) न केवल अनुमत है बल्कि विशेष रूप से निर्धारित है। फलाहार मानक है; निर्जला वैकल्पिक है लेकिन अत्यधिक पुण्यकारी है। तिल दान न छोड़ें — इसे व्रत जितना ही आवश्यक माना जाता है।
प्र.षट्तिला एकादशी व्रत कब रखना चाहिए?
माघ कृष्ण एकादशी — वर्ष में एक बार (जनवरी/फरवरी)। माघ मास के दौरान पड़ती है, जो स्वयं पवित्र नदियों में स्नान (माघ स्नान) और तिल संबंधी दान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
प्र.षट्तिला एकादशी व्रत के क्या लाभ हैं?
तिल के पवित्र उपयोग से शरीर और आत्मा की शुद्धि होती है, पूर्वजों की मुक्ति सुनिश्चित होती है, लालच और न-देने के पापों को दूर करता है, मृत्यु के बाद भक्त को विष्णु का लोक मिलता है, त्वचा रोगों और शारीरिक अशुद्धियों से राहत मिलती है।