एकादशी व्रत — हिंदू पवित्र उपवास
रमा एकादशी
संक्षिप्त परिचय
रमा एकादशी कार्तिक कृष्ण एकादशी — कार्तिक मास (अक्टूबर/नवंबर) के कृष्ण पक्ष की 11वीं तिथि — को होती है, दीपावली से ठीक पाँच दिन पहले। यहाँ "रमा" भगवान राम नहीं बल्कि विष्णु के हजार नामों में से एक है जिसका अर्थ "आनंद देने वाला" है। कार्तिक के पावन महीने में इस एकादशी का पालन हजार गौदान के समान पुण्यदायी है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
हजार गौदान के समान पुण्य मिलता है, भयंकर पाप नष्ट होते हैं, सबसे पावन कार्तिक मास में विष्णु की कृपा मिलती है, दीपावली के लिए आध्यात्मिक तैयारी होती है।
विधि
पूर्ण एकादशी व्रत रखें। सूर्योदय से पहले स्नान करें। तुलसी, फूल और दीपक से विष्णु पूजा करें। कार्तिक मास में शाम को मंदिर या तुलसी के पास दीपदान करें — इससे अतिरिक्त पुण्य मिलता है। विष्णु सहस्रनाम जपें। रमा एकादशी व्रत कथा सुनें। रात भर जागें।
व्रत कब रखें
कार्तिक कृष्ण एकादशी — वर्ष में एक बार (अक्टूबर/नवंबर)। दीपावली से पाँच दिन पहले।
व्रत नियम
अनाज नहीं, प्याज-लहसुन नहीं। फल, दूध और मेवे की अनुमति। कार्तिक मास में निर्जला व्रत विशेष पुण्यदायी।
व्रत कैसे खोलें
द्वादशी पर सूर्योदय के बाद विष्णु को तुलसी अर्पित करके फिर प्रसाद (फल, आँवला) से व्रत खोलें।
सामान्य प्रश्न
प्र.रमा एकादशी क्या है?
रमा एकादशी कार्तिक कृष्ण एकादशी — कार्तिक मास (अक्टूबर/नवंबर) के कृष्ण पक्ष की 11वीं तिथि — को होती है, दीपावली से ठीक पाँच दिन पहले। यहाँ "रमा" भगवान राम नहीं बल्कि विष्णु के हजार नामों में से एक है जिसका अर्थ "आनंद देने वाला" है। कार्तिक के पावन मह...
प्र.रमा एकादशी के व्रत नियम क्या हैं?
अनाज नहीं, प्याज-लहसुन नहीं। फल, दूध और मेवे की अनुमति। कार्तिक मास में निर्जला व्रत विशेष पुण्यदायी।
प्र.रमा एकादशी कब रखना चाहिए?
कार्तिक कृष्ण एकादशी — वर्ष में एक बार (अक्टूबर/नवंबर)। दीपावली से पाँच दिन पहले।
प्र.रमा एकादशी के क्या लाभ हैं?
हजार गौदान के समान पुण्य मिलता है, भयंकर पाप नष्ट होते हैं, सबसे पावन कार्तिक मास में विष्णु की कृपा मिलती है, दीपावली के लिए आध्यात्मिक तैयारी होती है।