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एकादशी व्रत — हिंदू पवित्र उपवास

कामदा एकादशी व्रत

देवता भगवान विष्णु (त्रिविक्रम)
प्रकार एकादशी व्रत

संक्षिप्त परिचय

कामदा एकादशी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को होती है — होली के बाद नए हिंदू वर्ष की पहली एकादशी। नाम का अर्थ है "इच्छाओं को पूर्ण करने वाली एकादशी।" वराह पुराण के अनुसार, इस एकादशी में ब्रह्महत्या जैसे सबसे जघन्य पापों को भी नष्ट करने की असाधारण शक्ति है। कहा जाता है कि इसकी कथा सुनने मात्र से एक हजार गाय दान का पुण्य मिलता है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

सभी सांसारिक इच्छाएं पूरी होती हैं, ब्रह्महत्या जैसे जघन्य पाप भी नष्ट होते हैं, एक हजार गाय दान का पुण्य मिलता है, स्वास्थ्य, धन और सफलता मिलती है और नए हिंदू वर्ष की शुरुआत में विष्णु का दिव्य आशीर्वाद मिलता है।

विधि

दशमी की शाम अनाज रहित हल्का भोजन करें। एकादशी की सुबह जल्दी स्नान करके विष्णु पूजा करें। तुलसी, पीले फूल और मिठाई अर्पित करें। वराह पुराण से कामदा एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें। पूरे दिन विष्णु सहस्रनाम या हरे कृष्ण मंत्र जपें। शाम की आरती करें और यदि संभव हो रात भर जागें। द्वादशी पर व्रत खोलें।

व्रत कब रखें

चैत्र शुक्ल एकादशी — वर्ष में एक बार (मार्च/अप्रैल)। होली के ठीक बाद होती है और नए हिंदू वर्ष की शुरुआत के साथ मेल खाती है।

व्रत नियम

सभी अनाज, चावल, गेहूँ, दाल, प्याज, लहसुन और माँसाहारी भोजन से बचें। फल, दूध, मेवे और साबूदाना की अनुमति है। निर्जला व्रत सर्वाधिक पुण्यकारी है। पूरे व्रत में विचार, वचन और कर्म में पवित्रता बनाए रखें।

व्रत कैसे खोलें

द्वादशी की सुबह सूर्योदय के बाद व्रत खोलें। विष्णु पूजा करें, तुलसी जल अर्पित करें, फिर प्रसाद खाएं। व्रत के पुण्य को बढ़ाने के लिए किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं या दान करें।

सामान्य प्रश्न

प्र.कामदा एकादशी व्रत क्या है?

कामदा एकादशी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को होती है — होली के बाद नए हिंदू वर्ष की पहली एकादशी। नाम का अर्थ है "इच्छाओं को पूर्ण करने वाली एकादशी।" वराह पुराण के अनुसार, इस एकादशी में ब्रह्महत्या जैसे सबसे जघन्य पापों को भी नष्ट करने की असाधारण...

प्र.कामदा एकादशी व्रत के व्रत नियम क्या हैं?

सभी अनाज, चावल, गेहूँ, दाल, प्याज, लहसुन और माँसाहारी भोजन से बचें। फल, दूध, मेवे और साबूदाना की अनुमति है। निर्जला व्रत सर्वाधिक पुण्यकारी है। पूरे व्रत में विचार, वचन और कर्म में पवित्रता बनाए रखें।

प्र.कामदा एकादशी व्रत कब रखना चाहिए?

चैत्र शुक्ल एकादशी — वर्ष में एक बार (मार्च/अप्रैल)। होली के ठीक बाद होती है और नए हिंदू वर्ष की शुरुआत के साथ मेल खाती है।

प्र.कामदा एकादशी व्रत के क्या लाभ हैं?

सभी सांसारिक इच्छाएं पूरी होती हैं, ब्रह्महत्या जैसे जघन्य पाप भी नष्ट होते हैं, एक हजार गाय दान का पुण्य मिलता है, स्वास्थ्य, धन और सफलता मिलती है और नए हिंदू वर्ष की शुरुआत में विष्णु का दिव्य आशीर्वाद मिलता है।

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