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वार्षिक व्रत — हिंदू पवित्र उपवास

जीवितपुत्रिका व्रत (जितिया)

देवता जीवितवाहन (जीमूतवाहन) और सूर्य
प्रकार वार्षिक व्रत

संक्षिप्त परिचय

जीवितपुत्रिका व्रत, जिसे जितिया के नाम से जाना जाता है, हिंदू पंचांग के सबसे कठिन व्रतों में से एक है — माताएं अपने पुत्रों और सभी बच्चों की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए इसे रखती हैं। यह आश्विन कृष्ण पक्ष में तीन दिनों में होता है: नहाय-खाय (सप्तमी), खुर-जितिया (अष्टमी का मुख्य निर्जला व्रत) और पारण (नवमी)।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

बच्चों को बीमारी, दुर्घटना और अकाल मृत्यु से सुरक्षा मिलती है, पुत्र और पुत्रियों को दीर्घायु और समृद्धि मिलती है, दिव्य कृपा से माँ-बच्चे का बंधन मजबूत होता है, बच्चों की ग्रह पीड़ाएं दूर होती हैं और माँ के त्याग से अपार पुण्य मिलता है।

विधि

दिन 1 (नहाय-खाय, सप्तमी): स्नान करें और पूरा सात्विक भोजन करें — व्रत से पहले अंतिम भोजन। दिन 2 (अष्टमी, मुख्य व्रत): 24 घंटे पूर्ण निर्जला व्रत। जीवितवाहन और सूर्य की पूजा करें। जितिया व्रत कथा पढ़ें या सुनें। माताएं अपने बच्चों का नाम लेकर प्रार्थना करें। दिन 3 (नवमी, पारण): सूर्योदय के बाद नोनी साग, मरू और मरुवा रोटी से व्रत खोलें।

व्रत कब रखें

आश्विन कृष्ण अष्टमी — तीन दिन का पालन सितंबर/अक्टूबर में होता है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में विशेष रूप से प्रमुख।

व्रत नियम

अष्टमी का मुख्य व्रत सख्त निर्जला व्रत है — 24 घंटे न पानी, न भोजन। पिछले दिन (नहाय-खाय) पूरा भोजन करने की अनुमति है; अगले दिन (पारण) पारंपरिक क्षेत्रीय भोजन से व्रत तोड़ते हैं।

व्रत कैसे खोलें

नवमी को सूर्योदय के बाद पारंपरिक पारण भोजन से व्रत खोलें: नोनी साग, मरू (चावल के आटे के गोले) और मरुवा रोटी (रागी की रोटी)। ये विशेष खाद्य पदार्थ पारण अनुष्ठान के लिए शुभ माने जाते हैं।

सामान्य प्रश्न

प्र.जीवितपुत्रिका व्रत (जितिया) क्या है?

जीवितपुत्रिका व्रत, जिसे जितिया के नाम से जाना जाता है, हिंदू पंचांग के सबसे कठिन व्रतों में से एक है — माताएं अपने पुत्रों और सभी बच्चों की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए इसे रखती हैं। यह आश्विन कृष्ण पक्ष में तीन दिनों में होता है: नहाय-खाय ...

प्र.जीवितपुत्रिका व्रत (जितिया) के व्रत नियम क्या हैं?

अष्टमी का मुख्य व्रत सख्त निर्जला व्रत है — 24 घंटे न पानी, न भोजन। पिछले दिन (नहाय-खाय) पूरा भोजन करने की अनुमति है; अगले दिन (पारण) पारंपरिक क्षेत्रीय भोजन से व्रत तोड़ते हैं।

प्र.जीवितपुत्रिका व्रत (जितिया) कब रखना चाहिए?

आश्विन कृष्ण अष्टमी — तीन दिन का पालन सितंबर/अक्टूबर में होता है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में विशेष रूप से प्रमुख।

प्र.जीवितपुत्रिका व्रत (जितिया) के क्या लाभ हैं?

बच्चों को बीमारी, दुर्घटना और अकाल मृत्यु से सुरक्षा मिलती है, पुत्र और पुत्रियों को दीर्घायु और समृद्धि मिलती है, दिव्य कृपा से माँ-बच्चे का बंधन मजबूत होता है, बच्चों की ग्रह पीड़ाएं दूर होती हैं और माँ के त्याग से अपार पुण्य मिलता है।

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