विष्णु एवं वैष्णव — वैदिक पूजा विधि
वैकुंठ एकादशी पूजा
संक्षिप्त परिचय
वैकुंठ एकादशी सभी 24 एकादशियों में सबसे शुभ है, जो मार्गशीर्ष (दिसंबर-जनवरी) के शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन वैकुंठ द्वारम (विष्णु के दिव्य निवास का द्वार) खुला होता है और जो भक्त उपवास और पूजा करते हैं उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है। विष्णु मंदिरों में तिरुवाध्यायन उत्सव का विशेष आयोजन होता है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
वैकुंठ (विष्णु के दिव्य धाम) में सीधा प्रवेश मिलता है, जन्म-मृत्यु के चक्र से मोक्ष और मुक्ति मिलती है, कई जन्मों के संचित पाप नष्ट होते हैं, भगवान विष्णु की परम कृपा प्राप्त होती है और सभी आध्यात्मिक इच्छाएं पूरी होती हैं।
चरण-दर-चरण विधि
दशमी की सूर्यास्त पर उपवास प्रारंभ करें। वैकुंठ एकादशी की सुबह पवित्र स्नान करें और अधिकतम भक्ति के साथ विष्णु की पूजा करें — तुलसी, पीले फूल, कमल और पंचामृत चढ़ाएं। विष्णु सहस्रनाम का 1008 बार पाठ करें। विष्णु भजनों के साथ पूरी रात जागरण करें। भोर में पूजा के बाद ही व्रत खोलें। यदि विष्णु मंदिर पास हो, तो वैकुंठ द्वारम से प्रवेश करें।
शुभ मुहूर्त
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (दिसंबर-जनवरी)। दक्षिण भारत के विष्णु मंदिरों में विशेष भव्यता के साथ मनाई जाती है।
आवश्यक सामग्री
- ·विष्णु प्रतिमा या शालिग्राम
- ·तुलसी पत्ते
- ·पीले फूल
- ·कमल के फूल
- ·पंचामृत
- ·अगरबत्ती
- ·घी का दीपक
- ·पीला वस्त्र
- ·फल और मिठाई
सामान्य प्रश्न
प्र.वैकुंठ एकादशी पूजा क्या है?
वैकुंठ एकादशी सभी 24 एकादशियों में सबसे शुभ है, जो मार्गशीर्ष (दिसंबर-जनवरी) के शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन वैकुंठ द्वारम (विष्णु के दिव्य निवास का द्वार) खुला होता है और जो भक्त उपवास और पूजा करते हैं उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है। विष्णु मं...
प्र.वैकुंठ एकादशी पूजा के क्या लाभ हैं?
वैकुंठ (विष्णु के दिव्य धाम) में सीधा प्रवेश मिलता है, जन्म-मृत्यु के चक्र से मोक्ष और मुक्ति मिलती है, कई जन्मों के संचित पाप नष्ट होते हैं, भगवान विष्णु की परम कृपा प्राप्त होती है और सभी आध्यात्मिक इच्छाएं पूरी होती हैं।
प्र.वैकुंठ एकादशी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (दिसंबर-जनवरी)। दक्षिण भारत के विष्णु मंदिरों में विशेष भव्यता के साथ मनाई जाती है।
प्र.वैकुंठ एकादशी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
विष्णु प्रतिमा या शालिग्राम, तुलसी पत्ते, पीले फूल, कमल के फूल, पंचामृत, अगरबत्ती, घी का दीपक, पीला वस्त्र, फल और मिठाई।