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खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIशुक्रवार, 24 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
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विष्णु एवं वैष्णव — वैदिक पूजा विधि

कृष्ण पूजा

देवता भगवान श्री कृष्ण
अवधि 1–2 घंटे
श्रेणी विष्णु एवं वैष्णव

संक्षिप्त परिचय

कृष्ण पूजा भगवान श्री कृष्ण — विष्णु के आठवें अवतार, भगवद्गीता के दिव्य गुरु, और प्रेम, आनंद और ब्रह्मांडीय ज्ञान के मूर्त स्वरूप — की भक्तिपूर्ण आराधना है। पूजा में माखन-मिश्री, तुलसी, पीले फूल चढ़ाए जाते हैं और हरे कृष्ण महामंत्र या अष्टाक्षर मंत्र का जाप होता है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

जीवन में आनंद और दिव्य प्रेम आता है, अहंकार और आसक्ति दूर होती है, ज्ञान और स्पष्टता मिलती है, नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है, संबंधों में सफलता मिलती है और आध्यात्मिक मुक्ति की ओर अग्रसर होते हैं।

चरण-दर-चरण विधि

कृष्ण प्रतिमा या चित्र स्थापित करें, यदि उपलब्ध हो तो छोटी पालकी भी रखें। माखन, मिश्री, पंचामृत, तुलसी पत्ते और पीले फूल चढ़ाएं। अगरबत्ती जलाएं। हरे कृष्ण महामंत्र 108 बार जपें या कृष्ण अष्टकम का पाठ करें। शंख के साथ आरती करें और प्रसाद बांटें।

शुभ मुहूर्त

जन्माष्टमी (कृष्ण अष्टमी), एकादशी, बुधवार और सोमवार, श्रावण मास में। जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि का समय सर्वोत्तम।

आवश्यक सामग्री

  • ·कृष्ण प्रतिमा या चित्र
  • ·माखन
  • ·मिश्री
  • ·तुलसी पत्ते
  • ·पीले फूल
  • ·पंचामृत
  • ·अगरबत्ती
  • ·शंख
  • ·बांसुरी (प्रतीक)

सामान्य प्रश्न

प्र.कृष्ण पूजा क्या है?

कृष्ण पूजा भगवान श्री कृष्ण — विष्णु के आठवें अवतार, भगवद्गीता के दिव्य गुरु, और प्रेम, आनंद और ब्रह्मांडीय ज्ञान के मूर्त स्वरूप — की भक्तिपूर्ण आराधना है। पूजा में माखन-मिश्री, तुलसी, पीले फूल चढ़ाए जाते हैं और हरे कृष्ण महामंत्र या अष्टाक्षर मंत्र...

प्र.कृष्ण पूजा के क्या लाभ हैं?

जीवन में आनंद और दिव्य प्रेम आता है, अहंकार और आसक्ति दूर होती है, ज्ञान और स्पष्टता मिलती है, नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है, संबंधों में सफलता मिलती है और आध्यात्मिक मुक्ति की ओर अग्रसर होते हैं।

प्र.कृष्ण पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

जन्माष्टमी (कृष्ण अष्टमी), एकादशी, बुधवार और सोमवार, श्रावण मास में। जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि का समय सर्वोत्तम।

प्र.कृष्ण पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

कृष्ण प्रतिमा या चित्र, माखन, मिश्री, तुलसी पत्ते, पीले फूल, पंचामृत, अगरबत्ती, शंख, बांसुरी (प्रतीक)।

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