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देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि

सीता पूजा

देवता माँ सीता
अवधि 1–2 घंटे
श्रेणी देवी पूजा

संक्षिप्त परिचय

सीता पूजा में देवी सीता की आराधना होती है — भगवान राम की परम प्रिया, राजा जनक की पुत्री और पवित्रता, सतीत्व, धैर्य और निःस्वार्थ प्रेम की साक्षात मूर्ति। भूमि-देवी की पुत्री (पृथ्वी से उत्पन्न) के रूप में सीता हिंदू परंपरा में नारी सद्गुण और पातिव्रत्य की आदर्श मानी जाती हैं। सीता नवमी (उनकी प्राकट्य तिथि) और विवाह पंचमी (राम-सीता के दिव्य विवाह का दिन) सबसे शुभ अवसर हैं।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

वफादार और सदाचारी जीवनसाथी का आशीर्वाद मिलता है, विवाह बंधन मजबूत होता है, जीवनसाथी खोजने में बाधाएं दूर होती हैं, कठिनाइयां सहने की धैर्य-शक्ति मिलती है, घर शुद्ध होता है, मंगल दोष और वैवाहिक पीड़ाएं शांत होती हैं।

चरण-दर-चरण विधि

सीता-राम की प्रतिमा या सीता के चित्र के साथ वेदी स्थापित करें। पीले फूल और तुलसी से सजाएं। देवी को पीला कपड़ा, हल्दी, कुमकुम और चूड़ियां चढ़ाएं। वाल्मीकि रामायण के प्रासंगिक अध्याय पढ़ें या जानकी स्तुति गाएं। सीता स्तोत्र या सीता सहस्रनाम का पाठ करें। सात्त्विक भोजन — खीर, फल, नारियल — नैवेद्य के रूप में चढ़ाएं। घी के दीपक और अगरबत्ती जलाएं। आरती करें।

शुभ मुहूर्त

सीता नवमी (वैशाख शुक्ल नवमी), विवाह पंचमी (मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी), प्रत्येक मंगलवार और राम नवमी।

आवश्यक सामग्री

  • ·सीता या सीता-राम प्रतिमा
  • ·पीले फूल (गेंदा, चंपा)
  • ·तुलसी पत्ते
  • ·पीला कपड़ा
  • ·हल्दी
  • ·कुमकुम
  • ·हरी चूड़ियां
  • ·घी का दीपक
  • ·अगरबत्ती
  • ·खीर या नारियल की मिठाई
  • ·फल
  • ·नारियल

सामान्य प्रश्न

प्र.सीता पूजा क्या है?

सीता पूजा में देवी सीता की आराधना होती है — भगवान राम की परम प्रिया, राजा जनक की पुत्री और पवित्रता, सतीत्व, धैर्य और निःस्वार्थ प्रेम की साक्षात मूर्ति। भूमि-देवी की पुत्री (पृथ्वी से उत्पन्न) के रूप में सीता हिंदू परंपरा में नारी सद्गुण और पातिव्रत...

प्र.सीता पूजा के क्या लाभ हैं?

वफादार और सदाचारी जीवनसाथी का आशीर्वाद मिलता है, विवाह बंधन मजबूत होता है, जीवनसाथी खोजने में बाधाएं दूर होती हैं, कठिनाइयां सहने की धैर्य-शक्ति मिलती है, घर शुद्ध होता है, मंगल दोष और वैवाहिक पीड़ाएं शांत होती हैं।

प्र.सीता पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

सीता नवमी (वैशाख शुक्ल नवमी), विवाह पंचमी (मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी), प्रत्येक मंगलवार और राम नवमी।

प्र.सीता पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

सीता या सीता-राम प्रतिमा, पीले फूल (गेंदा, चंपा), तुलसी पत्ते, पीला कपड़ा, हल्दी, कुमकुम, हरी चूड़ियां, घी का दीपक, अगरबत्ती, खीर या नारियल की मिठाई, फल, नारियल।

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