आज: वैदिक ज्योतिष · प्राचीन · सटीक · मुफ्त
खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIशुक्रवार, 24 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
VedicBirth
वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि

नवरात्रि पूजा

देवता माँ दुर्गा (नौ स्वरूप)
अवधि 9 दिनों तक प्रतिदिन 1–2 घंटे
श्रेणी देवी पूजा

संक्षिप्त परिचय

नवरात्रि पूजा वर्ष में दो बार — चैत्र नवरात्रि (वसंत में) और शारद नवरात्रि (शरद ऋतु में) — नौ रातों तक देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का महापर्व है। प्रत्येक दिन एक देवी की पूजा होती है: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। व्रत, दुर्गा सप्तशती का पाठ, अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजा और लाल फूल, सिंदूर, नारियल के विशेष अर्पण से पूजा संपन्न होती है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

नकारात्मक ऊर्जाएं और बुरे प्रभाव नष्ट होते हैं, शक्ति और साहस मिलता है, सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, शत्रुओं और आपदाओं से रक्षा होती है, समृद्धि एवं आध्यात्मिक मुक्ति प्राप्त होती है।

चरण-दर-चरण विधि

पहले दिन आम के पत्तों और नारियल सहित कलश स्थापित करें। दुर्गा प्रतिमा या यंत्र स्थापित करें। नौ दिनों के लिए अखंड ज्योति जलाएं। प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। नौ स्वरूपों की विशेष सामग्री से पूजा करें। अष्टमी या नवमी को कन्या पूजा करें — नौ कन्याओं के चरण धोएं, भोजन और उपहार दें। हवन और विसर्जन से समापन करें।

शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि (चैत्र मास शुक्ल प्रतिपदा) और शारद नवरात्रि (आश्विन मास शुक्ल प्रतिपदा)। प्रतिदिन सूर्योदय के समय पूजा करना सर्वोत्तम है।

आवश्यक सामग्री

  • ·दुर्गा प्रतिमा या चित्र
  • ·आम के पत्तों सहित कलश
  • ·नारियल
  • ·लाल फूल (गुड़हल, गुलाब)
  • ·सिंदूर
  • ·दुर्गा सप्तशती पुस्तक
  • ·अखंड दीया (घी)
  • ·अगरबत्ती
  • ·लाल कपड़ा
  • ·फल और मिठाई
  • ·सुपारी और पान के पत्ते

सामान्य प्रश्न

प्र.नवरात्रि पूजा क्या है?

नवरात्रि पूजा वर्ष में दो बार — चैत्र नवरात्रि (वसंत में) और शारद नवरात्रि (शरद ऋतु में) — नौ रातों तक देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का महापर्व है। प्रत्येक दिन एक देवी की पूजा होती है: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता,...

प्र.नवरात्रि पूजा के क्या लाभ हैं?

नकारात्मक ऊर्जाएं और बुरे प्रभाव नष्ट होते हैं, शक्ति और साहस मिलता है, सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, शत्रुओं और आपदाओं से रक्षा होती है, समृद्धि एवं आध्यात्मिक मुक्ति प्राप्त होती है।

प्र.नवरात्रि पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

चैत्र नवरात्रि (चैत्र मास शुक्ल प्रतिपदा) और शारद नवरात्रि (आश्विन मास शुक्ल प्रतिपदा)। प्रतिदिन सूर्योदय के समय पूजा करना सर्वोत्तम है।

प्र.नवरात्रि पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

दुर्गा प्रतिमा या चित्र, आम के पत्तों सहित कलश, नारियल, लाल फूल (गुड़हल, गुलाब), सिंदूर, दुर्गा सप्तशती पुस्तक, अखंड दीया (घी), अगरबत्ती, लाल कपड़ा, फल और मिठाई, सुपारी और पान के पत्ते।

संबंधित पूजाएं