देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि
लक्ष्मी पूजा
संक्षिप्त परिचय
लक्ष्मी पूजा धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी को घर और व्यापार में आमंत्रित करने के लिए की जाती है। दीवाली (कार्तिक अमावस्या), प्रत्येक शुक्रवार और कोजागरी पूर्णिमा पर विशेष रूप से की जाती है। पूजा में प्रवेश द्वार पर रंगोली, दीपक जलाना, कमल के फूल, सिक्के, मिठाई चढ़ाना और श्री सूक्त या लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ शामिल है।
अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
धन और आर्थिक समृद्धि आती है, दरिद्रता दूर होती है, व्यापार में सफलता मिलती है, परिवार में सुख-शांति रहती है।
चरण-दर-चरण विधि
घर को अच्छी तरह साफ करें। प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाएं। लक्ष्मी प्रतिमा के साथ सिक्के और कमल के फूल रखें। मिट्टी के दीपक जलाएं। मिठाई, फल और पान के पत्ते चढ़ाएं। श्री सूक्त का 16 बार पाठ करें। आरती करें।
शुभ मुहूर्त
दीवाली (कार्तिक अमावस्या), प्रत्येक शुक्रवार, पूर्णिमा और प्रदोष।
आवश्यक सामग्री
- ·लक्ष्मी प्रतिमा
- ·कमल के फूल
- ·सोने/चाँदी के सिक्के
- ·मिट्टी के दीपक
- ·रंगोली
- ·मिठाई
- ·पान के पत्ते
- ·नारियल
- ·अगरबत्ती
सामान्य प्रश्न
प्र.लक्ष्मी पूजा क्या है?
लक्ष्मी पूजा धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी को घर और व्यापार में आमंत्रित करने के लिए की जाती है। दीवाली (कार्तिक अमावस्या), प्रत्येक शुक्रवार और कोजागरी पूर्णिमा पर विशेष रूप से की जाती है। पूजा में प्रवेश द्वार पर रंगोली, दीपक जलाना, कमल के फूल, सि...
प्र.लक्ष्मी पूजा के क्या लाभ हैं?
धन और आर्थिक समृद्धि आती है, दरिद्रता दूर होती है, व्यापार में सफलता मिलती है, परिवार में सुख-शांति रहती है।
प्र.लक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
दीवाली (कार्तिक अमावस्या), प्रत्येक शुक्रवार, पूर्णिमा और प्रदोष।
प्र.लक्ष्मी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
लक्ष्मी प्रतिमा, कमल के फूल, सोने/चाँदी के सिक्के, मिट्टी के दीपक, रंगोली, मिठाई, पान के पत्ते, नारियल, अगरबत्ती।