देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि
दुर्गा पूजा
संक्षिप्त परिचय
दुर्गा पूजा बंगाल और पूर्वी भारत में सबसे भव्य हिंदू त्योहार है, जो राक्षस महिषासुर पर देवी दुर्गा की विजय का उत्सव मनाता है। नवरात्रि के दौरान 10 दिन विस्तृत अनुष्ठानों, मिट्टी की मूर्तियों, सामुदायिक पंडालों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जाता है।
अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
शत्रुओं और नकारात्मकता का नाश होता है, खतरों से सुरक्षा होती है, शक्ति और साहस मिलता है, सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
चरण-दर-चरण विधि
प्रतिपदा पर दुर्गा प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिदिन षोडशोपचार पूजा (16 चरण) करें। देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) पढ़ें। अष्टमी पर कन्या पूजा करें। नवमी पर नवमी हवन। दशमी पर विसर्जन।
शुभ मुहूर्त
आश्विन (शारद) नवरात्रि — प्रतिपदा से दशमी तक। चैत्र नवरात्रि में भी।
आवश्यक सामग्री
- ·दुर्गा प्रतिमा
- ·लाल सिंदूर
- ·लाल फूल (गुड़हल)
- ·दुर्गा सप्तशती पुस्तक
- ·हवन सामग्री
- ·नौ प्रकार के पत्ते
- ·नारियल
सामान्य प्रश्न
प्र.दुर्गा पूजा क्या है?
दुर्गा पूजा बंगाल और पूर्वी भारत में सबसे भव्य हिंदू त्योहार है, जो राक्षस महिषासुर पर देवी दुर्गा की विजय का उत्सव मनाता है। नवरात्रि के दौरान 10 दिन विस्तृत अनुष्ठानों, मिट्टी की मूर्तियों, सामुदायिक पंडालों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया ज...
प्र.दुर्गा पूजा के क्या लाभ हैं?
शत्रुओं और नकारात्मकता का नाश होता है, खतरों से सुरक्षा होती है, शक्ति और साहस मिलता है, सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
प्र.दुर्गा पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
आश्विन (शारद) नवरात्रि — प्रतिपदा से दशमी तक। चैत्र नवरात्रि में भी।
प्र.दुर्गा पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
दुर्गा प्रतिमा, लाल सिंदूर, लाल फूल (गुड़हल), दुर्गा सप्तशती पुस्तक, हवन सामग्री, नौ प्रकार के पत्ते, नारियल।