देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि
काली पूजा
संक्षिप्त परिचय
काली पूजा देवी काली — शक्ति के उग्र स्वरूप — की आराधना है जो बुराई और अज्ञानता को नष्ट करती हैं। कार्तिक की अमावस्या की रात (कुछ क्षेत्रों में दीवाली की रात) सबसे प्रमुखता से मनाई जाती है। सुरक्षा, साहस और शत्रुओं व नकारात्मक शक्तियों के नाश के लिए अमावस्या और नवरात्रि पर भी की जाती है।
अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
नकारात्मक ऊर्जाएं और शत्रु नष्ट होते हैं, साहस और निर्भयता मिलती है, बुराई से सुरक्षा होती है, गहरे भय दूर होते हैं, मोक्ष मिलता है।
चरण-दर-चरण विधि
रात को (मध्यरात्रि सबसे शुभ) करें। काली प्रतिमा स्थापित करें। लाल गुड़हल के फूल, लाल चंदन चढ़ाएं। काली बीज मंत्र (क्रीं) का जाप करें। महाकाली स्तोत्र या देवी माहात्म्य का पाठ करें। गुड़ से बनी मिठाई का प्रसाद चढ़ाएं।
शुभ मुहूर्त
कार्तिक अमावस्या (काली पूजा उत्सव की रात), सभी अमावस्या की रातें, नवरात्रि (अष्टमी की रात), या मंगलवार मध्यरात्रि।
आवश्यक सामग्री
- ·काली प्रतिमा
- ·लाल गुड़हल के फूल
- ·लाल चंदन
- ·अगरबत्ती
- ·घी का दीपक
- ·गुड़ की मिठाई
- ·नींबू
- ·काले तिल
सामान्य प्रश्न
प्र.काली पूजा क्या है?
काली पूजा देवी काली — शक्ति के उग्र स्वरूप — की आराधना है जो बुराई और अज्ञानता को नष्ट करती हैं। कार्तिक की अमावस्या की रात (कुछ क्षेत्रों में दीवाली की रात) सबसे प्रमुखता से मनाई जाती है। सुरक्षा, साहस और शत्रुओं व नकारात्मक शक्तियों के नाश के लिए अ...
प्र.काली पूजा के क्या लाभ हैं?
नकारात्मक ऊर्जाएं और शत्रु नष्ट होते हैं, साहस और निर्भयता मिलती है, बुराई से सुरक्षा होती है, गहरे भय दूर होते हैं, मोक्ष मिलता है।
प्र.काली पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
कार्तिक अमावस्या (काली पूजा उत्सव की रात), सभी अमावस्या की रातें, नवरात्रि (अष्टमी की रात), या मंगलवार मध्यरात्रि।
प्र.काली पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
काली प्रतिमा, लाल गुड़हल के फूल, लाल चंदन, अगरबत्ती, घी का दीपक, गुड़ की मिठाई, नींबू, काले तिल।