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देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि

महालक्ष्मी पूजा

देवता माँ महालक्ष्मी
अवधि 2–3 घंटे
श्रेणी देवी पूजा

संक्षिप्त परिचय

महालक्ष्मी पूजा में देवी लक्ष्मी के सर्वोच्च स्वरूप — महालक्ष्मी — की आराधना होती है, जो तीनों प्रकार की समृद्धि की अधिष्ठात्री हैं: भौतिक संपदा (धन लक्ष्मी), आध्यात्मिक वैभव (मोक्ष लक्ष्मी) और शुभता (शुभ लक्ष्मी)। यह विस्तृत पूजा कोजागरी पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा), नवरात्रि और श्रावण मास के शुक्रवार को की जाती है। षोडशोपचार पूजन, श्री सूक्त, महालक्ष्मी अष्टकम और आदि शंकराचार्य द्वारा रचित कनकधारा स्तोत्र का पाठ होता है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

अपार धन आकर्षित होता है और दीर्घकालिक दरिद्रता समाप्त होती है, आय के नए स्रोत खुलते हैं, व्यापार और निवेश में सफलता मिलती है, वित्तीय कठिनाइयों से संबंधित पितृ दोष दूर होता है, दीर्घायु और स्वास्थ्य मिलता है।

चरण-दर-चरण विधि

घर को शुद्ध करें और पूर्व दिशा में वेदी स्थापित करें। महालक्ष्मी प्रतिमा को लाल कपड़े पर रखें। आवाहन मंत्र से देवी का आवाहन करें। षोडशोपचार करें — पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, दक्षिणा, विसर्जन। श्री सूक्त का 108 बार पाठ करें। कमल के फूल, केसर और सुनहरी मिठाई अर्पित करें। महालक्ष्मी आरती से समाप्त करें।

शुभ मुहूर्त

कोजागरी पूर्णिमा (आश्विन पूर्णिमा), श्रावण मास के शुक्रवार, दीवाली और वरलक्ष्मी व्रतम (श्रावण पूर्णिमा से पहले का शुक्रवार)।

आवश्यक सामग्री

  • ·महालक्ष्मी प्रतिमा या यंत्र
  • ·लाल कपड़ा
  • ·कमल के फूल
  • ·सोने/चाँदी के सिक्के
  • ·केसर
  • ·कुमकुम
  • ·हल्दी
  • ·कपूर
  • ·घी के दीपक
  • ·नारियल
  • ·मिठाई (खीर या लड्डू)
  • ·पान के पत्ते और सुपारी

सामान्य प्रश्न

प्र.महालक्ष्मी पूजा क्या है?

महालक्ष्मी पूजा में देवी लक्ष्मी के सर्वोच्च स्वरूप — महालक्ष्मी — की आराधना होती है, जो तीनों प्रकार की समृद्धि की अधिष्ठात्री हैं: भौतिक संपदा (धन लक्ष्मी), आध्यात्मिक वैभव (मोक्ष लक्ष्मी) और शुभता (शुभ लक्ष्मी)। यह विस्तृत पूजा कोजागरी पूर्णिमा (श...

प्र.महालक्ष्मी पूजा के क्या लाभ हैं?

अपार धन आकर्षित होता है और दीर्घकालिक दरिद्रता समाप्त होती है, आय के नए स्रोत खुलते हैं, व्यापार और निवेश में सफलता मिलती है, वित्तीय कठिनाइयों से संबंधित पितृ दोष दूर होता है, दीर्घायु और स्वास्थ्य मिलता है।

प्र.महालक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

कोजागरी पूर्णिमा (आश्विन पूर्णिमा), श्रावण मास के शुक्रवार, दीवाली और वरलक्ष्मी व्रतम (श्रावण पूर्णिमा से पहले का शुक्रवार)।

प्र.महालक्ष्मी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

महालक्ष्मी प्रतिमा या यंत्र, लाल कपड़ा, कमल के फूल, सोने/चाँदी के सिक्के, केसर, कुमकुम, हल्दी, कपूर, घी के दीपक, नारियल, मिठाई (खीर या लड्डू), पान के पत्ते और सुपारी।

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