विष्णु एवं वैष्णव — वैदिक पूजा विधि
नरसिंह पूजा
संक्षिप्त परिचय
नरसिंह पूजा भगवान नरसिंह की आराधना है, जो विष्णु के चौथे अवतार हैं और अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने तथा राक्षस राजा हिरण्यकशिपु का वध करने के लिए नर-सिंह रूप में प्रकट हुए। यह अवतार दैवीय साहस, भीषण रक्षा और अत्याचार पर भक्ति की विजय का प्रतीक है। नरसिंह एक स्तंभ से संध्या काल में प्रकट हुए, यह दर्शाते हुए कि ईश्वर सभी सीमाओं से परे है। नरसिंह की पूजा बुराई के नाश और सच्चे भक्तों को अभय प्रदान करने के लिए विशेष रूप से शक्तिशाली है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
शत्रुओं, काले जादू, दुष्ट आत्माओं और नकारात्मक शक्तियों से भीषण सुरक्षा; गहरे भय और चिंताओं का निवारण; विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति; कानूनी विवादों और संघर्षों में विजय; परिवार के सदस्यों की सुरक्षा; अशुभ ग्रह दशाओं का निवारण; संकट से अचानक बचाव; प्रह्लाद के समान आध्यात्मिक साहस और अटल भक्ति का जागरण।
चरण-दर-चरण विधि
भगवान नरसिंह की प्रतिमा (उग्र नरसिंह या लक्ष्मी-नरसिंह स्वरूप) को पूर्व की ओर मुख करके स्थापित करें। गंगाजल और नरसिंह बीज मंत्र से स्थान शुद्ध करें। गणपति पूजा से प्रारंभ करें। पंचामृत और जल अभिषेक करें। लाल और पीले फूलों से सजाएं (सफेद नहीं)। तिल के तेल का दीपक जलाएं। फल, नारियल और नैवेद्य अर्पित करें। नरसिंह कवचम्, अष्टकम् और अष्टोत्तर का पाठ करें। कपूर से आरती उतारें। रुद्राक्ष माला से "ॐ नमो भगवते नरसिंहाय" का 108 बार जाप करें। क्षमा प्रार्थना से समाप्त करें।
शुभ मुहूर्त
नरसिंह जयंती (वैशाख शुक्ल चतुर्दशी) सबसे पवित्र दिन है। प्रदोष (13वीं चंद्र तिथि का संध्याकाल), चतुर्दशी और शनिवार भी शुभ हैं। संध्याकाल प्रदोष काल उनके प्रकटन के समय को प्रतिबिंबित करता है।
आवश्यक सामग्री
- ·नरसिंह की प्रतिमा या चित्र (उग्र या लक्ष्मी-नरसिंह स्वरूप)
- ·लाल और पीले फूल (सफेद नहीं)
- ·तिल के तेल का दीपक
- ·पंचामृत
- ·रुद्राक्ष माला
- ·नरसिंह कवचम् पाठ
- ·नारियल
- ·कपूर
- ·अगरबत्ती
- ·फल और नैवेद्य
- ·चंदन का लेप
- ·हल्दी और कुमकुम
- ·गंगाजल
सामान्य प्रश्न
प्र.नरसिंह पूजा क्या है?
नरसिंह पूजा भगवान नरसिंह की आराधना है, जो विष्णु के चौथे अवतार हैं और अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने तथा राक्षस राजा हिरण्यकशिपु का वध करने के लिए नर-सिंह रूप में प्रकट हुए। यह अवतार दैवीय साहस, भीषण रक्षा और अत्याचार पर भक्ति की विजय का प्रतीक है।...
प्र.नरसिंह पूजा के क्या लाभ हैं?
शत्रुओं, काले जादू, दुष्ट आत्माओं और नकारात्मक शक्तियों से भीषण सुरक्षा; गहरे भय और चिंताओं का निवारण; विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति; कानूनी विवादों और संघर्षों में विजय; परिवार के सदस्यों की सुरक्षा; अशुभ ग्रह दशाओं का निवारण; संकट से अचानक बचाव; प्रह्लाद के समान आध्यात्मिक साहस और अटल भक्ति का जागरण।
प्र.नरसिंह पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
नरसिंह जयंती (वैशाख शुक्ल चतुर्दशी) सबसे पवित्र दिन है। प्रदोष (13वीं चंद्र तिथि का संध्याकाल), चतुर्दशी और शनिवार भी शुभ हैं। संध्याकाल प्रदोष काल उनके प्रकटन के समय को प्रतिबिंबित करता है।
प्र.नरसिंह पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
नरसिंह की प्रतिमा या चित्र (उग्र या लक्ष्मी-नरसिंह स्वरूप), लाल और पीले फूल (सफेद नहीं), तिल के तेल का दीपक, पंचामृत, रुद्राक्ष माला, नरसिंह कवचम् पाठ, नारियल, कपूर, अगरबत्ती, फल और नैवेद्य, चंदन का लेप, हल्दी और कुमकुम, गंगाजल।