देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि
मातंगी पूजा
संक्षिप्त परिचय
मातंगी पूजा नवम महाविद्या देवी मातंगी की तांत्रिक उपासना है। श्यामल वर्ण की ये देवी वीणा, खप्पर, खड्ग और अंकुश धारण करती हैं। "उच्छिष्ट चाण्डालिनी" — यही इनका सबसे गुप्त नाम है; वे जूठे अन्न में वास करती हैं, समाज के हाशिए पर बैठती हैं और यही सिखाती हैं कि पवित्र और अपवित्र दोनों में ईश्वर समान रूप से विद्यमान है। ये तांत्रिक परिप्रेक्ष्य में सरस्वती का ही उग्र रूप हैं — परंपरागत विद्या से परे, संगीत, जादू, वशीकरण और वाक्-सिद्धि की स्वामिनी। संगीतकार, नृत्यकार, कलाकार, वक्ता और वशीकरण की इच्छा रखने वाले विशेष रूप से इनकी आराधना करते हैं।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
संगीत, नृत्य और कलाओं में महारत मिलती है, वाक्-सिद्धि और वशीकरण की शक्ति प्राप्त होती है, कलह और विवाद समाप्त होते हैं, दिव्य श्रवण (क्लैरऑडियंस) की क्षमता जागती है, छुपी हुई कलात्मक प्रतिभा खिलती है, आत्माभिव्यक्ति के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक अवरोध टूटते हैं।
चरण-दर-चरण विधि
हरे कपड़े से वेदी सजाएं। मातंगी यंत्र और वीणा या वाद्ययंत्र वेदी के पास रखें। उच्छिष्ट भोजन का भोग — साधक पहले थोड़ा खाकर बाकी देवी को चढ़ाता है — यही इस पूजा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। हरे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, हरी जड़ी-बूटियों से पका चावल और हरी चूड़ियां चढ़ाएं। तिल या नीम के तेल के दीपक जलाएं। स्फटिक माला से मातंगी मूल मंत्र (ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं मातंग्ये नमः) का 1008 बार जप करें। संगीत प्रस्तुति भी विशेष भोग है। मातंगी स्तोत्र और उच्छिष्ट गणपति पूजा से पूर्ण तांत्रिक अनुष्ठान सम्पन्न करें।
शुभ मुहूर्त
दोनों नवरात्रियों की नवमी, रविवार की रात, माघ और आषाढ़ मास, मातंगी जयंती। रात्रि में गृहस्थों के भोजन के बाद (जब उच्छिष्ट स्वाभाविक रूप से उपस्थित हो) सर्वोत्तम समय है।
आवश्यक सामग्री
- ·मातंगी यंत्र
- ·हरा कपड़ा
- ·वीणा या कोई वाद्ययंत्र
- ·हरे फल (कच्चा आम, नींबू)
- ·हरी सब्जियां
- ·जड़ी-बूटियों से पका चावल
- ·हरी चूड़ियां
- ·स्फटिक माला
- ·तिल या नीम तेल का दीपक
- ·उच्छिष्ट भोजन (जूठा प्रसाद)
- ·हरी अगरबत्ती
सामान्य प्रश्न
प्र.मातंगी पूजा क्या है?
मातंगी पूजा नवम महाविद्या देवी मातंगी की तांत्रिक उपासना है। श्यामल वर्ण की ये देवी वीणा, खप्पर, खड्ग और अंकुश धारण करती हैं। "उच्छिष्ट चाण्डालिनी" — यही इनका सबसे गुप्त नाम है; वे जूठे अन्न में वास करती हैं, समाज के हाशिए पर बैठती हैं और यही सिखाती ...
प्र.मातंगी पूजा के क्या लाभ हैं?
संगीत, नृत्य और कलाओं में महारत मिलती है, वाक्-सिद्धि और वशीकरण की शक्ति प्राप्त होती है, कलह और विवाद समाप्त होते हैं, दिव्य श्रवण (क्लैरऑडियंस) की क्षमता जागती है, छुपी हुई कलात्मक प्रतिभा खिलती है, आत्माभिव्यक्ति के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक अवरोध टूटते हैं।
प्र.मातंगी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
दोनों नवरात्रियों की नवमी, रविवार की रात, माघ और आषाढ़ मास, मातंगी जयंती। रात्रि में गृहस्थों के भोजन के बाद (जब उच्छिष्ट स्वाभाविक रूप से उपस्थित हो) सर्वोत्तम समय है।
प्र.मातंगी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
मातंगी यंत्र, हरा कपड़ा, वीणा या कोई वाद्ययंत्र, हरे फल (कच्चा आम, नींबू), हरी सब्जियां, जड़ी-बूटियों से पका चावल, हरी चूड़ियां, स्फटिक माला, तिल या नीम तेल का दीपक, उच्छिष्ट भोजन (जूठा प्रसाद), हरी अगरबत्ती।