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देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि

ललिता पूजा

देवता देवी ललिता त्रिपुर सुंदरी
अवधि 1–2 घंटे
श्रेणी देवी पूजा

संक्षिप्त परिचय

ललिता पूजा देवी ललिता त्रिपुर सुंदरी की पवित्र आराधना है — दस महाविद्याओं में से एक और श्री विद्या परंपरा की अधिष्ठात्री देवी। ललिता परम शक्ति हैं जो सौंदर्य, आनंद और परम शक्ति का अवतार हैं। श्री चक्र उनका ज्यामितीय स्वरूप और ललिता पूजा का केंद्र बिंदु है। उनका ललिता सहस्रनाम शाक्त परंपरा में सबसे प्रसिद्ध स्तोत्रों में से एक है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

दिव्य सौंदर्य और चुंबकीय व्यक्तित्व का वरदान मिलता है, प्रेम और सामंजस्यपूर्ण संबंधों की इच्छाएं पूरी होती हैं, समृद्धि मिलती है, कुंडलिनी ऊर्जा जागृत होती है, नकारात्मक कर्मों का निवारण होता है और सच्चे साधकों को मोक्ष मिलता है।

चरण-दर-चरण विधि

पूर्व दिशा की ओर मुख करके स्वच्छ वेदी बनाएं। ललिता की छवि के साथ श्री यंत्र स्थापित करें। यंत्र पर पंचामृत अभिषेक करें। लाल फूलों, कुमकुम और अगरबत्ती से सजाएं। ललिता अष्टोत्तर या ललिता सहस्रनाम का पाठ करें। लाल फल और दूध की मिठाई अर्पित करें। ललिता आरती से समापन करें।

शुभ मुहूर्त

नवरात्रि (चैत्र और शारद दोनों) सबसे शक्तिशाली समय है। साल भर शुक्रवार, पूर्णिमा और अष्टमी तिथि आदर्श हैं। आश्विन माह श्री विद्या पूजा के लिए विशेष रूप से पवित्र है।

आवश्यक सामग्री

  • ·श्री यंत्र (श्री चक्र)
  • ·ललिता की छवि या मूर्ति
  • ·पंचामृत
  • ·लाल फूल (गुलाब, गुड़हल)
  • ·कुमकुम
  • ·सुगंधित अगरबत्ती
  • ·घी का दीपक
  • ·लाल फल (अनार, सेब)
  • ·दूध की मिठाई
  • ·कपूर
  • ·चंदन का लेप
  • ·लाल कपड़ा

सामान्य प्रश्न

प्र.ललिता पूजा क्या है?

ललिता पूजा देवी ललिता त्रिपुर सुंदरी की पवित्र आराधना है — दस महाविद्याओं में से एक और श्री विद्या परंपरा की अधिष्ठात्री देवी। ललिता परम शक्ति हैं जो सौंदर्य, आनंद और परम शक्ति का अवतार हैं। श्री चक्र उनका ज्यामितीय स्वरूप और ललिता पूजा का केंद्र बिं...

प्र.ललिता पूजा के क्या लाभ हैं?

दिव्य सौंदर्य और चुंबकीय व्यक्तित्व का वरदान मिलता है, प्रेम और सामंजस्यपूर्ण संबंधों की इच्छाएं पूरी होती हैं, समृद्धि मिलती है, कुंडलिनी ऊर्जा जागृत होती है, नकारात्मक कर्मों का निवारण होता है और सच्चे साधकों को मोक्ष मिलता है।

प्र.ललिता पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

नवरात्रि (चैत्र और शारद दोनों) सबसे शक्तिशाली समय है। साल भर शुक्रवार, पूर्णिमा और अष्टमी तिथि आदर्श हैं। आश्विन माह श्री विद्या पूजा के लिए विशेष रूप से पवित्र है।

प्र.ललिता पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

श्री यंत्र (श्री चक्र), ललिता की छवि या मूर्ति, पंचामृत, लाल फूल (गुलाब, गुड़हल), कुमकुम, सुगंधित अगरबत्ती, घी का दीपक, लाल फल (अनार, सेब), दूध की मिठाई, कपूर, चंदन का लेप, लाल कपड़ा।

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