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देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि

करवा चौथ पूजा

देवता देवी पार्वती एवं भगवान शिव
अवधि 1 दिन (सूर्योदय से चंद्रोदय तक)
श्रेणी देवी पूजा

संक्षिप्त परिचय

करवा चौथ एक पवित्र एकदिवसीय व्रत है जो विवाहित हिंदू महिलाएं अपने पतियों की दीर्घायु, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए रखती हैं। कार्तिक माह में पूर्णिमा के चौथे दिन मनाया जाने वाला यह व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक बिना अन्न-जल के रखा जाता है। शाम की पूजा में देवी पार्वती की उपासना, करवा चौथ कथा श्रवण और चलनी से चंद्रमा देख कर पति का मुख देखते हुए व्रत खोला जाता है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

करवा चौथ पूजा विवाहित महिलाओं को पति के साथ प्रेम और निष्ठा का अटूट बंधन प्रदान करती है। इसे पति की दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य, वैवाहिक सौहार्द, और देवी पार्वती की कृपा से सुखमय दांपत्य जीवन का आशीर्वाद देने वाला माना जाता है। यह व्रत साधक के मन को शुद्ध करता है और विवाह के भीतर आध्यात्मिक समर्पण को गहरा करता है।

चरण-दर-चरण विधि

सूर्योदय से पहले सास द्वारा दी गई सरगी (भोर का भोजन) ग्रहण करें। दिनभर निर्जला (बिना जल के) व्रत रखें। सायंकाल में अन्य महिलाओं के साथ एकत्र हों, दुल्हन की तरह सज-धज कर देवी पार्वती की प्रतिमा के सामने मिट्टी का करवा, दीया और फूल-मिठाई रखकर पूजा करें। करवा चौथ कथा सुनें या पढ़ें। चंद्रोदय के बाद चलनी से चंद्रमा देखें, फिर उसी चलनी से पति का मुख देखें। पति जल पिलाकर व्रत खुलवाएं, तत्पश्चात भोजन ग्रहण करें।

शुभ मुहूर्त

हिंदू माह कार्तिक (अक्टूबर–नवंबर) में पूर्णिमा के बाद चतुर्थी तिथि, सूर्योदय से चंद्रोदय तक।

आवश्यक सामग्री

  • ·करवा (टोंटीदार मिट्टी का बर्तन)
  • ·दीया (मिट्टी का दीपक)
  • ·रोली और अक्षत
  • ·फूल और माला
  • ·मिठाई और फल
  • ·मेहंदी
  • ·चूड़ियां और सिंदूर
  • ·चलनी
  • ·पूजा थाली
  • ·देवी पार्वती की प्रतिमा या मूर्ति

सामान्य प्रश्न

प्र.करवा चौथ पूजा क्या है?

करवा चौथ एक पवित्र एकदिवसीय व्रत है जो विवाहित हिंदू महिलाएं अपने पतियों की दीर्घायु, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए रखती हैं। कार्तिक माह में पूर्णिमा के चौथे दिन मनाया जाने वाला यह व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक बिना अन्न-जल के रखा जाता है। शाम की पूजा म...

प्र.करवा चौथ पूजा के क्या लाभ हैं?

करवा चौथ पूजा विवाहित महिलाओं को पति के साथ प्रेम और निष्ठा का अटूट बंधन प्रदान करती है। इसे पति की दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य, वैवाहिक सौहार्द, और देवी पार्वती की कृपा से सुखमय दांपत्य जीवन का आशीर्वाद देने वाला माना जाता है। यह व्रत साधक के मन को शुद्ध करता है और विवाह के भीतर आध्यात्मिक समर्पण को गहरा करता है।

प्र.करवा चौथ पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

हिंदू माह कार्तिक (अक्टूबर–नवंबर) में पूर्णिमा के बाद चतुर्थी तिथि, सूर्योदय से चंद्रोदय तक।

प्र.करवा चौथ पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

करवा (टोंटीदार मिट्टी का बर्तन), दीया (मिट्टी का दीपक), रोली और अक्षत, फूल और माला, मिठाई और फल, मेहंदी, चूड़ियां और सिंदूर, चलनी, पूजा थाली, देवी पार्वती की प्रतिमा या मूर्ति।

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