देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि
कामाख्या पूजा
संक्षिप्त परिचय
कामाख्या पूजा गुवाहाटी, असम के नीलाचल पर्वत पर स्थित कामाख्या शक्तिपीठ की अधिष्ठात्री देवी कामाख्या की सर्वोच्च तांत्रिक उपासना है। यह विश्व के सबसे प्रतिष्ठित शक्तिपीठों में से एक है। कामाख्या को ब्रह्मांड की योनि (गर्भ) के रूप में पूजा जाता है — यह सृजन की आदि शक्ति का प्रतीक है। देवी की कोई परंपरागत मूर्ति नहीं है; उनका गर्भगृह एक प्राकृतिक शिला-दरारी है जो भूमिगत झरने से सदा आर्द्र रहती है। वार्षिक अंबुबाची मेले में देवी के रजस्वला होने की मान्यता है। इच्छापूर्ति, संतान प्राप्ति और तांत्रिक सिद्धि के लिए यह पूजा अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
गहरी इच्छाएं और कामनाएं पूर्ण होती हैं (काम सिद्धि), संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है, तांत्रिक शक्तियां और सिद्धियां प्राप्त होती हैं, दीर्घकालिक पीड़ाएं और नकारात्मक कर्म नष्ट होते हैं, काले जादू और बुरी आत्माओं से रक्षा होती है, प्रेम और वैवाहिक जीवन में सुख मिलता है।
चरण-दर-चरण विधि
पश्चिम दिशा में लाल कपड़े से वेदी सजाएं। कामाख्या यंत्र और लाल श्रीचक्र स्थापित करें। लाल गुड़हल, लाल सिंदूर, लाल मिठाई चढ़ाएं (तांत्रिक परंपरा में मत्स्य-मांस भी)। सरसों के तेल के दीपक जलाएं। कामाख्या बीज मंत्र (क्रीं ह्रीं श्रीं) का 108 या 1008 बार जप करें। कामाख्या स्तोत्र और देवी माहात्म्य का पाठ करें। लाल अंगवस्त्र अर्पित करें। अंबुबाची काल में विशेष लाल प्रसाद से पूजा करें। शक्ति आरती से समापन करें।
शुभ मुहूर्त
अंबुबाची मेला (जून, आषाढ़ मास), नवरात्रि (चैत्र और शारदीय दोनों), अष्टमी-नवमी, मंगलवार और शुक्रवार की रात। निशीथ काल सर्वाधिक प्रभावशाली।
आवश्यक सामग्री
- ·कामाख्या यंत्र
- ·लाल कपड़ा
- ·लाल गुड़हल के फूल
- ·लाल सिंदूर
- ·लाल मिठाई
- ·सरसों तेल का दीपक
- ·लाल अंगवस्त्र
- ·सुपारी और पान
- ·कुमकुम
- ·मत्स्य या मांस (वाम मार्ग परंपरा)
- ·नारियल
- ·लाल कुमकुम
सामान्य प्रश्न
प्र.कामाख्या पूजा क्या है?
कामाख्या पूजा गुवाहाटी, असम के नीलाचल पर्वत पर स्थित कामाख्या शक्तिपीठ की अधिष्ठात्री देवी कामाख्या की सर्वोच्च तांत्रिक उपासना है। यह विश्व के सबसे प्रतिष्ठित शक्तिपीठों में से एक है। कामाख्या को ब्रह्मांड की योनि (गर्भ) के रूप में पूजा जाता है — यह...
प्र.कामाख्या पूजा के क्या लाभ हैं?
गहरी इच्छाएं और कामनाएं पूर्ण होती हैं (काम सिद्धि), संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है, तांत्रिक शक्तियां और सिद्धियां प्राप्त होती हैं, दीर्घकालिक पीड़ाएं और नकारात्मक कर्म नष्ट होते हैं, काले जादू और बुरी आत्माओं से रक्षा होती है, प्रेम और वैवाहिक जीवन में सुख मिलता है।
प्र.कामाख्या पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
अंबुबाची मेला (जून, आषाढ़ मास), नवरात्रि (चैत्र और शारदीय दोनों), अष्टमी-नवमी, मंगलवार और शुक्रवार की रात। निशीथ काल सर्वाधिक प्रभावशाली।
प्र.कामाख्या पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
कामाख्या यंत्र, लाल कपड़ा, लाल गुड़हल के फूल, लाल सिंदूर, लाल मिठाई, सरसों तेल का दीपक, लाल अंगवस्त्र, सुपारी और पान, कुमकुम, मत्स्य या मांस (वाम मार्ग परंपरा), नारियल, लाल कुमकुम।