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विष्णु एवं वैष्णव — वैदिक पूजा विधि

जन्माष्टमी पूजा

देवता भगवान कृष्ण (विष्णु अवतार)
अवधि दिन भर व्रत + 1–2 घंटे की मध्यरात्रि पूजा
श्रेणी विष्णु एवं वैष्णव

संक्षिप्त परिचय

जन्माष्टमी पूजा भगवान कृष्ण के जन्म का भव्य मध्यरात्रि उत्सव है — भगवान विष्णु के आठवें अवतार — जो भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (अगस्त-सितंबर) को मनाया जाता है। कृष्ण का जन्म मथुरा की जेल में मध्यरात्रि को हुआ था। पूजा में कृष्ण प्रतिमा का पंचामृत से अभिषेक, शाही वस्त्रों से श्रृंगार, सजे हुए झूले पर स्थापना, भजन-कीर्तन, कठोर व्रत और मध्यरात्रि शंखनाद के बाद व्रत पारण शामिल हैं।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

परिवार पर भगवान कृष्ण — दिव्य प्रेम, ज्ञान और माधुर्य के अवतार — का आशीर्वाद बरसता है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं, अनेक जन्मों के पाप और नकारात्मक कर्म नष्ट होते हैं, घर में आनंद और भक्ति भाव आता है, बुराई और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है और पूर्ण श्रद्धा से व्रत करने वाले को मोक्ष मिलता है।

चरण-दर-चरण विधि

दिन की शुरुआत सख्त व्रत (निर्जला या फलाहार) से करें। घर को फूलों, रंगोली और तोरण से सजाएं। बाल कृष्ण के लिए फूलों, मोर पंखों और रेशमी कपड़े से सजा झूला तैयार करें। संध्याकाल में आरती करें। रात भर भजन-कीर्तन और भागवत पुराण के दशम स्कंध का पाठ करें। मध्यरात्रि को कृष्ण मूर्ति का पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक करें। पीताम्बर और तुलसी की माला से श्रृंगार करें। शंखनाद के साथ जन्म की घोषणा करें। माखन-मिश्री, पंजीरी का प्रसाद अर्पित करें और तभी व्रत खोलें।

शुभ मुहूर्त

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी ही सही दिन है। पूजा अनिवार्य रूप से मध्यरात्रि में करनी चाहिए — जो कृष्ण के वास्तविक जन्म का समय है। अष्टमी के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग विशेष रूप से शुभ माना जाता है और इसे जयंती कहते हैं।

आवश्यक सामग्री

  • ·कृष्ण मूर्ति (बाल गोपाल / लड्डू गोपाल)
  • ·सजा हुआ झूला
  • ·पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर)
  • ·गंगाजल
  • ·मूर्ति के लिए पीले रेशमी वस्त्र
  • ·तुलसी माला
  • ·मोर पंख
  • ·फूल और रंगोली
  • ·माखन-मिश्री
  • ·पंजीरी
  • ·अगरबत्ती
  • ·कपूर
  • ·शंख
  • ·घी का दीपक
  • ·चंदन का लेप
  • ·मौसमी फल

सामान्य प्रश्न

प्र.जन्माष्टमी पूजा क्या है?

जन्माष्टमी पूजा भगवान कृष्ण के जन्म का भव्य मध्यरात्रि उत्सव है — भगवान विष्णु के आठवें अवतार — जो भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (अगस्त-सितंबर) को मनाया जाता है। कृष्ण का जन्म मथुरा की जेल में मध्यरात्रि को हुआ था। पूजा में कृष्ण प्रतिमा का पंचामृत से अभिषेक,...

प्र.जन्माष्टमी पूजा के क्या लाभ हैं?

परिवार पर भगवान कृष्ण — दिव्य प्रेम, ज्ञान और माधुर्य के अवतार — का आशीर्वाद बरसता है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं, अनेक जन्मों के पाप और नकारात्मक कर्म नष्ट होते हैं, घर में आनंद और भक्ति भाव आता है, बुराई और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है और पूर्ण श्रद्धा से व्रत करने वाले को मोक्ष मिलता है।

प्र.जन्माष्टमी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी ही सही दिन है। पूजा अनिवार्य रूप से मध्यरात्रि में करनी चाहिए — जो कृष्ण के वास्तविक जन्म का समय है। अष्टमी के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग विशेष रूप से शुभ माना जाता है और इसे जयंती कहते हैं।

प्र.जन्माष्टमी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

कृष्ण मूर्ति (बाल गोपाल / लड्डू गोपाल), सजा हुआ झूला, पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर), गंगाजल, मूर्ति के लिए पीले रेशमी वस्त्र, तुलसी माला, मोर पंख, फूल और रंगोली, माखन-मिश्री, पंजीरी, अगरबत्ती, कपूर, शंख, घी का दीपक, चंदन का लेप, मौसमी फल।

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