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विष्णु एवं वैष्णव — वैदिक पूजा विधि

जगन्नाथ पूजा

देवता भगवान जगन्नाथ (जगत के स्वामी)
अवधि 1–1.5 घंटे पाठ सहित संपूर्ण पूजा के लिए
श्रेणी विष्णु एवं वैष्णव

संक्षिप्त परिचय

जगन्नाथ पूजा भगवान जगन्नाथ की आराधना है, जो पुरी, ओडिशा में विराजमान विष्णु का सर्वव्यापी स्वरूप हैं — भारत के चार पवित्र धामों में से एक। "जगन्नाथ" का अर्थ है "जगत के स्वामी," जिनकी पूजा उनके भाई-बहन बलभद्र और सुभद्रा के साथ की जाती है। इस पूजा की विशेषता इसकी लोकतांत्रिक परंपरा है — कोई जाति भेद नहीं होता, और पका हुआ प्रसाद (महाप्रसाद) परम पवित्र माना जाता है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

सच्ची आराधना से अनेक जन्मों के पापों से मुक्ति; जाति, पंथ या सामाजिक स्थिति की परवाह किए बिना सभी भक्तों पर समान कृपा; भौतिक और आध्यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति; यात्राओं के दौरान सुरक्षा; परिवार की एकता और सामुदायिक सद्भाव के लिए आशीर्वाद; कष्टों और सांसारिक दुखों से राहत; मृत्यु के बाद वैकुंठ की प्राप्ति; रथ यात्रा में भाग लेने या देखने से विशेष पुण्य।

चरण-दर-चरण विधि

स्वच्छ वेदी पर जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के चित्र स्थापित करें। आवाहन से प्रारंभ करें और देवताओं को आसन अर्पित करें। पंचामृत और स्वच्छ जल से अभिषेक करें। देवताओं को रंगीन नए वस्त्र पहनाएं और फूलों व तुलसी से सजाएं। घी के दीपक और अगरबत्ती जलाएं। पका हुआ भोजन (चावल, दाल और मिठाई महाप्रसाद के रूप में), फल और नारियल अर्पित करें। जगन्नाथ अष्टकम्, अष्टोत्तर और भक्ति भजन का पाठ करें। कपूर से आरती उतारें। घंटी के साथ "जय जगन्नाथ" का उद्घोष करें। बिना भेदभाव के सभी में महाप्रसाद वितरित करें।

शुभ मुहूर्त

आषाढ़ शुक्ल द्वितीया (रथ यात्रा का प्रारंभ), स्नान पूर्णिमा, एकादशी तिथियां (विशेषतः निर्जला और वैकुंठ एकादशी), और गुरुवार। रथ यात्रा मास आषाढ़ सर्वाधिक पवित्र अवधि है।

आवश्यक सामग्री

  • ·जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के चित्र
  • ·तीन देवताओं के लिए रंगीन वस्त्र
  • ·तुलसी और सुगंधित फूल
  • ·पंचामृत
  • ·पका हुआ चावल और मिठाई (महाप्रसाद)
  • ·नारियल
  • ·घी का दीपक
  • ·कपूर
  • ·अगरबत्ती
  • ·पान के पत्ते
  • ·फल
  • ·चंदन का लेप
  • ·घंटी

सामान्य प्रश्न

प्र.जगन्नाथ पूजा क्या है?

जगन्नाथ पूजा भगवान जगन्नाथ की आराधना है, जो पुरी, ओडिशा में विराजमान विष्णु का सर्वव्यापी स्वरूप हैं — भारत के चार पवित्र धामों में से एक। "जगन्नाथ" का अर्थ है "जगत के स्वामी," जिनकी पूजा उनके भाई-बहन बलभद्र और सुभद्रा के साथ की जाती है। इस पूजा की व...

प्र.जगन्नाथ पूजा के क्या लाभ हैं?

सच्ची आराधना से अनेक जन्मों के पापों से मुक्ति; जाति, पंथ या सामाजिक स्थिति की परवाह किए बिना सभी भक्तों पर समान कृपा; भौतिक और आध्यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति; यात्राओं के दौरान सुरक्षा; परिवार की एकता और सामुदायिक सद्भाव के लिए आशीर्वाद; कष्टों और सांसारिक दुखों से राहत; मृत्यु के बाद वैकुंठ की प्राप्ति; रथ यात्रा में भाग लेने या देखने से विशेष पुण्य।

प्र.जगन्नाथ पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

आषाढ़ शुक्ल द्वितीया (रथ यात्रा का प्रारंभ), स्नान पूर्णिमा, एकादशी तिथियां (विशेषतः निर्जला और वैकुंठ एकादशी), और गुरुवार। रथ यात्रा मास आषाढ़ सर्वाधिक पवित्र अवधि है।

प्र.जगन्नाथ पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के चित्र, तीन देवताओं के लिए रंगीन वस्त्र, तुलसी और सुगंधित फूल, पंचामृत, पका हुआ चावल और मिठाई (महाप्रसाद), नारियल, घी का दीपक, कपूर, अगरबत्ती, पान के पत्ते, फल, चंदन का लेप, घंटी।

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