विष्णु एवं वैष्णव — वैदिक पूजा विधि
गोवत्स द्वादशी पूजा
संक्षिप्त परिचय
गोवत्स द्वादशी, जिसे वसु बारस या नंदिनी व्रत भी कहते हैं, कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष द्वादशी को मनाई जाती है। यह गाय और उसके बछड़े की पूजा को समर्पित है, जो प्रचुरता, पोषण और भगवान विष्णु की दिव्य कृपा का प्रतीक है। हिंदू धर्म में गाय को कामधेनु — इच्छापूर्ण दिव्य गाय — की पार्थिव प्रतिनिधि के रूप में पवित्र माना जाता है। इस दिन भक्त गाय और बछड़े की फूल, धूप और विशेष भोजन से पूजा करते हैं और बच्चों के कल्याण तथा परिवार की समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
गोवत्स द्वादशी पूजा से भगवान विष्णु और दिव्य कामधेनु का आशीर्वाद प्राप्त होता है जो संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुख के लिए है। यह मनोकामनाएं पूर्ण करती है, भौतिक समृद्धि लाती है, बच्चों की रक्षा करती है और वंश की निरंतरता सुनिश्चित करती है। यह पूजा अपार पुण्य अर्जित करती है और कई जन्मों के पापों को धो देती है।
चरण-दर-चरण विधि
गोवत्स द्वादशी की सुबह स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। गाय और बछड़े को खोजें और उनके आसपास की जगह साफ करें। गाय और बछड़े को माला से सजाएं और उनके माथे पर रोली और हल्दी लगाएं। गाय को ताजी घास, गुड़, गेहूं की रोटी और तिल अर्पित करें। अगरबत्ती और दीया जलाएं। भगवान विष्णु की प्रार्थना करें और गोवत्स द्वादशी व्रत कथा पढ़ें। गाय और बछड़े की तीन बार परिक्रमा करें। दिनभर व्रत रखें, केवल एक बार भोजन करें और दूध व डेयरी उत्पादों से परहेज करें। गोशाला में दान दें या सेवा कार्य के रूप में गायों को चारा खिलाएं।
शुभ मुहूर्त
कार्तिक कृष्ण द्वादशी (कार्तिक के कृष्ण पक्ष का बारहवां दिन), सामान्यतः अक्टूबर–नवंबर, धनतेरस से एक दिन पहले।
आवश्यक सामग्री
- ·गाय के लिए फूल और माला
- ·रोली और हल्दी
- ·ताजी घास और गुड़
- ·गेहूं की रोटी और तिल
- ·अगरबत्ती
- ·दीया और घी
- ·पूजा थाली
- ·जल से भरा कलश
- ·भगवान विष्णु की प्रतिमा या मूर्ति
- ·तुलसी के पत्ते
सामान्य प्रश्न
प्र.गोवत्स द्वादशी पूजा क्या है?
गोवत्स द्वादशी, जिसे वसु बारस या नंदिनी व्रत भी कहते हैं, कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष द्वादशी को मनाई जाती है। यह गाय और उसके बछड़े की पूजा को समर्पित है, जो प्रचुरता, पोषण और भगवान विष्णु की दिव्य कृपा का प्रतीक है। हिंदू धर्म में गाय को कामधेनु — इच्...
प्र.गोवत्स द्वादशी पूजा के क्या लाभ हैं?
गोवत्स द्वादशी पूजा से भगवान विष्णु और दिव्य कामधेनु का आशीर्वाद प्राप्त होता है जो संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुख के लिए है। यह मनोकामनाएं पूर्ण करती है, भौतिक समृद्धि लाती है, बच्चों की रक्षा करती है और वंश की निरंतरता सुनिश्चित करती है। यह पूजा अपार पुण्य अर्जित करती है और कई जन्मों के पापों को धो देती है।
प्र.गोवत्स द्वादशी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
कार्तिक कृष्ण द्वादशी (कार्तिक के कृष्ण पक्ष का बारहवां दिन), सामान्यतः अक्टूबर–नवंबर, धनतेरस से एक दिन पहले।
प्र.गोवत्स द्वादशी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
गाय के लिए फूल और माला, रोली और हल्दी, ताजी घास और गुड़, गेहूं की रोटी और तिल, अगरबत्ती, दीया और घी, पूजा थाली, जल से भरा कलश, भगवान विष्णु की प्रतिमा या मूर्ति, तुलसी के पत्ते।