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विष्णु एवं वैष्णव — वैदिक पूजा विधि

एकादशी पूजा

देवता भगवान विष्णु
अवधि 24 घंटे का उपवास एवं 1–2 घंटे की सुबह की पूजा
श्रेणी विष्णु एवं वैष्णव

संक्षिप्त परिचय

एकादशी पूजा प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की 11वीं तिथि को मनाई जाती है — वर्ष में कुल 24 पवित्र एकादशियां होती हैं। यह भगवान विष्णु को समर्पित है और इसमें कठोर उपवास, जागरण और गहन भक्तिपूर्ण पूजा शामिल है। प्रत्येक एकादशी का अपना विशेष नाम और अनुष्ठान महत्व है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

आत्मा के संचित पापों का नाश होता है, आध्यात्मिक प्रगति तीव्र होती है, उपवास से शारीरिक स्वास्थ्य सुधरता है, भगवान विष्णु की कृपा मिलती है, भौतिक इच्छाएं क्षीण होती हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

चरण-दर-चरण विधि

दशमी (10वें दिन) सूर्यास्त से उपवास शुरू करें। एकादशी की सुबह स्नान करें और तुलसी, पीले फूल और अगरबत्ती के साथ विष्णु की पूजा करें। उपवास (निर्जला या फलाहार) रखें। विष्णु सहस्रनाम या एकादशी माहात्म्य का पाठ करें। भजन-कीर्तन के साथ रात्रि जागरण करें। द्वादशी को पूजा के बाद व्रत खोलें।

शुभ मुहूर्त

प्रत्येक एकादशी (प्रत्येक पखवाड़े का 11वां चंद्र दिन)। वैकुंठ एकादशी और निर्जला एकादशी को सबसे पवित्र माना जाता है।

आवश्यक सामग्री

  • ·विष्णु प्रतिमा या शालिग्राम
  • ·तुलसी पत्ते
  • ·पीले फूल
  • ·अगरबत्ती
  • ·घी का दीपक
  • ·फल प्रसाद के लिए
  • ·पंचामृत

सामान्य प्रश्न

प्र.एकादशी पूजा क्या है?

एकादशी पूजा प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की 11वीं तिथि को मनाई जाती है — वर्ष में कुल 24 पवित्र एकादशियां होती हैं। यह भगवान विष्णु को समर्पित है और इसमें कठोर उपवास, जागरण और गहन भक्तिपूर्ण पूजा शामिल है। प्रत्येक एकादशी का अपना विशेष नाम और ...

प्र.एकादशी पूजा के क्या लाभ हैं?

आत्मा के संचित पापों का नाश होता है, आध्यात्मिक प्रगति तीव्र होती है, उपवास से शारीरिक स्वास्थ्य सुधरता है, भगवान विष्णु की कृपा मिलती है, भौतिक इच्छाएं क्षीण होती हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

प्र.एकादशी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

प्रत्येक एकादशी (प्रत्येक पखवाड़े का 11वां चंद्र दिन)। वैकुंठ एकादशी और निर्जला एकादशी को सबसे पवित्र माना जाता है।

प्र.एकादशी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

विष्णु प्रतिमा या शालिग्राम, तुलसी पत्ते, पीले फूल, अगरबत्ती, घी का दीपक, फल प्रसाद के लिए, पंचामृत।

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