देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि
दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा)
संक्षिप्त परिचय
दीवाली पूजा वर्ष की सबसे शुभ लक्ष्मी-गणेश पूजा है, जो कार्तिक मास की अमावस्या की रात को की जाती है। धन, वैभव और समृद्धि की देवी लक्ष्मी को विघ्नहर्ता भगवान गणेश के साथ घर में आमंत्रित किया जाता है। घरों को साफ किया जाता है, दीयों और रंगोली से सजाया जाता है, और पूजा रात को प्रदोष काल में की जाती है। व्यापारी नई बही-खाता खोलते हैं और आने वाले वर्ष के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
देवी लक्ष्मी को घर में स्थायी समृद्धि के लिए आमंत्रित करती है, आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं, नए व्यापारिक अवसर मिलते हैं, वर्ष भर समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है, और पूरे परिवार को सुख और सद्भाव मिलता है।
चरण-दर-चरण विधि
पूरे घर को दीयों, रंगोली और फूलों से सजाएं। लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियां वेदी पर स्थापित करें। मूर्ति के पास नए सिक्के, बही-खाता और क़ीमती सामान रखें। प्रदोष काल में गणेश पूजा से शुरू करें, फिर 16 उपचारों से लक्ष्मी पूजा करें। पूरे घर में सभी दीये जलाएं। लक्ष्मी चालीसा या श्री सूक्त का पाठ करें। आरती करें और मिठाई प्रसाद बांटें।
शुभ मुहूर्त
कार्तिक अमावस्या (दीवाली की रात) प्रदोष काल और स्थिर लग्न में। वर्ष में एक बार दीवाली पर की जाती है।
आवश्यक सामग्री
- ·लक्ष्मी प्रतिमा या चित्र
- ·गणेश प्रतिमा
- ·नए सिक्के और नोट
- ·लाल कपड़ा
- ·कमल के फूल
- ·गेंदे के फूल
- ·दीये
- ·रंगोली रंग
- ·मिठाई (खील, बताशे)
- ·अगरबत्ती
- ·कपूर
- ·कुमकुम
- ·हल्दी
- ·बही-खाता
सामान्य प्रश्न
प्र.दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) क्या है?
दीवाली पूजा वर्ष की सबसे शुभ लक्ष्मी-गणेश पूजा है, जो कार्तिक मास की अमावस्या की रात को की जाती है। धन, वैभव और समृद्धि की देवी लक्ष्मी को विघ्नहर्ता भगवान गणेश के साथ घर में आमंत्रित किया जाता है। घरों को साफ किया जाता है, दीयों और रंगोली से सजाया ज...
प्र.दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) के क्या लाभ हैं?
देवी लक्ष्मी को घर में स्थायी समृद्धि के लिए आमंत्रित करती है, आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं, नए व्यापारिक अवसर मिलते हैं, वर्ष भर समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है, और पूरे परिवार को सुख और सद्भाव मिलता है।
प्र.दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) का सबसे अच्छा समय क्या है?
कार्तिक अमावस्या (दीवाली की रात) प्रदोष काल और स्थिर लग्न में। वर्ष में एक बार दीवाली पर की जाती है।
प्र.दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
लक्ष्मी प्रतिमा या चित्र, गणेश प्रतिमा, नए सिक्के और नोट, लाल कपड़ा, कमल के फूल, गेंदे के फूल, दीये, रंगोली रंग, मिठाई (खील, बताशे), अगरबत्ती, कपूर, कुमकुम, हल्दी, बही-खाता।