आज: वैदिक ज्योतिष · प्राचीन · सटीक · मुफ्त
खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIशुक्रवार, 24 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
VedicBirth
वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि

भुवनेश्वरी पूजा

देवता देवी भुवनेश्वरी (त्रिभुवन की रानी)
अवधि 2–4 घंटे (सामान्य); सम्पूर्ण आशीर्वाद हेतु 9-दिवसीय नवरात्रि साधना
श्रेणी देवी पूजा

संक्षिप्त परिचय

भुवनेश्वरी पूजा चतुर्थ महाविद्या देवी भुवनेश्वरी की दिव्य तांत्रिक उपासना है। "भुवन" (समस्त लोक) की "ईश्वरी" (स्वामिनी) — ये देवी ब्रह्मांड की समग्र महाराज्ञी हैं। इनका स्वरूप — प्रातःकालीन सूर्य की लालिमा, मस्तक पर चंद्रकला, पाश और अंकुश धारण करती हुईं, दो हस्तों से अभय और वर देती हैं। आकाश-चेतना ही इनका शरीर है। समस्त सृष्टि इन्हीं से उत्पन्न होती है और इन्हीं में विलीन होती है। भुवनेश्वरी तंत्र की शिक्षा है कि इनकी उपासना से साधक को अनुभव होता है कि उसकी अपनी आत्मा भी आकाश की भांति असीम और अनंत है — यही स्त्री-तत्व के माध्यम से ब्रह्म-साक्षात्कार है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

चेतना का विस्तार होता है और संकुचित अहंकार की सीमाएं टूटती हैं, जीवन के सभी क्षेत्रों में संप्रभुता और नेतृत्व प्राप्त होता है, विशाल और स्थायी धन-समृद्धि मिलती है, अभाव और भय की मानसिकता दूर होती है, उदार और विस्तृत व्यक्तित्व विकसित होता है, आत्म-साक्षात्कार की दिशा में प्रगति त्वरित होती है, ध्यान में चिदाकाश का अनुभव होता है।

चरण-दर-चरण विधि

पूर्व दिशा में सुनहरे या केसरिया कपड़े से वेदी सजाएं। मध्य में भुवनेश्वरी यंत्र स्थापित करें। प्राणायाम से आरंभ करें और चेतना को अनंत आकाश के भाव तक विस्तारित करें। गणेश आवाहन के बाद भुवनेश्वरी ध्यान श्लोक पढ़ें। षोडशोपचार पूजा करें — सुनहरे फूल (चम्पा, गेंदा), फल, दूध, शहद और सुगंध का उदार अर्पण। स्फटिक या रुद्राक्ष माला से भुवनेश्वरी मूल मंत्र (ह्रीं) या (ॐ ऐं ह्रीं श्रीं भुवनेश्वर्यै नमः) का 1008 बार जप करें। अनंत आकाश के रूप में देवी का ध्यान करें। देवी माहात्म्य के 1–3 अध्याय (मधु-कैटभ प्रसंग) पढ़ें। कपूर की ज्योति से आरती करें।

शुभ मुहूर्त

शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी, गुरुवार और शुक्रवार, दोनों नवरात्रि, भुवनेश्वरी जयंती (आश्विन शुक्ल अष्टमी)। ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) सर्वोत्तम — जब आकाश सबसे विस्तृत और प्रकाशमान होता है।

आवश्यक सामग्री

  • ·भुवनेश्वरी यंत्र
  • ·सुनहरा या केसरिया कपड़ा
  • ·सुनहरे फूल (चम्पा, गेंदा)
  • ·दूध और शहद
  • ·केसर
  • ·आरती के लिए कपूर
  • ·स्फटिक माला या रुद्राक्ष माला
  • ·इत्र (गुलाब, चमेली या चम्पा)
  • ·फल (केला, आम, अनार)
  • ·घी का दीपक
  • ·देवी माहात्म्य ग्रंथ

सामान्य प्रश्न

प्र.भुवनेश्वरी पूजा क्या है?

भुवनेश्वरी पूजा चतुर्थ महाविद्या देवी भुवनेश्वरी की दिव्य तांत्रिक उपासना है। "भुवन" (समस्त लोक) की "ईश्वरी" (स्वामिनी) — ये देवी ब्रह्मांड की समग्र महाराज्ञी हैं। इनका स्वरूप — प्रातःकालीन सूर्य की लालिमा, मस्तक पर चंद्रकला, पाश और अंकुश धारण करती ह...

प्र.भुवनेश्वरी पूजा के क्या लाभ हैं?

चेतना का विस्तार होता है और संकुचित अहंकार की सीमाएं टूटती हैं, जीवन के सभी क्षेत्रों में संप्रभुता और नेतृत्व प्राप्त होता है, विशाल और स्थायी धन-समृद्धि मिलती है, अभाव और भय की मानसिकता दूर होती है, उदार और विस्तृत व्यक्तित्व विकसित होता है, आत्म-साक्षात्कार की दिशा में प्रगति त्वरित होती है, ध्यान में चिदाकाश का अनुभव होता है।

प्र.भुवनेश्वरी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी, गुरुवार और शुक्रवार, दोनों नवरात्रि, भुवनेश्वरी जयंती (आश्विन शुक्ल अष्टमी)। ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) सर्वोत्तम — जब आकाश सबसे विस्तृत और प्रकाशमान होता है।

प्र.भुवनेश्वरी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

भुवनेश्वरी यंत्र, सुनहरा या केसरिया कपड़ा, सुनहरे फूल (चम्पा, गेंदा), दूध और शहद, केसर, आरती के लिए कपूर, स्फटिक माला या रुद्राक्ष माला, इत्र (गुलाब, चमेली या चम्पा), फल (केला, आम, अनार), घी का दीपक, देवी माहात्म्य ग्रंथ।

संबंधित पूजाएं