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देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि

अष्टलक्ष्मी पूजा

देवता अष्टलक्ष्मी (देवी लक्ष्मी के आठ स्वरूप)
अवधि 1–2 घंटे
श्रेणी देवी पूजा

संक्षिप्त परिचय

अष्टलक्ष्मी पूजा देवी लक्ष्मी के आठ प्रमुख स्वरूपों की आराधना है, जिनमें से प्रत्येक समृद्धि और कल्याण के एक विशेष क्षेत्र की अधिष्ठात्री हैं। आठ स्वरूप हैं: आदि लक्ष्मी (आदिम, शाश्वत स्वरूप), धन लक्ष्मी (मौद्रिक धन की देवी), धान्य लक्ष्मी (कृषि समृद्धि और अनाज की देवी), गज लक्ष्मी (हाथियों से घिरी, राजसी शक्ति और संप्रभुता की देवी), संतान लक्ष्मी (संतान और वंश की देवी), वीर लक्ष्मी (साहस और वीरता की देवी), विजय लक्ष्मी (सभी प्रयासों में विजय की देवी) और विद्या लक्ष्मी (ज्ञान और विवेक की देवी)। मिलकर अष्टलक्ष्मी समृद्धि का पूर्ण दर्शन प्रस्तुत करती हैं।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

अष्टलक्ष्मी पूजा एक साथ समृद्धि के सभी आठ क्षेत्रों में आशीर्वाद प्राप्त कराती है। उपासकों को प्रचुर धन और वित्तीय स्थिरता (धन लक्ष्मी), खाद्य सुरक्षा और कृषि सफलता (धान्य लक्ष्मी), राजसी अनुग्रह और नेतृत्व शक्ति (गज लक्ष्मी), संतान और वंश के आशीर्वाद (संतान लक्ष्मी), बाधाओं पर विजय का साहस (वीर लक्ष्मी), प्रतियोगिताओं में सफलता (विजय लक्ष्मी), तीव्र बुद्धि और शैक्षणिक सफलता (विद्या लक्ष्मी) और आदिशक्ति का मूल अनुग्रह (आदि लक्ष्मी) प्राप्त होता है।

चरण-दर-चरण विधि

अष्टलक्ष्मी पूजा आदर्श रूप से शुक्रवार, गुरुवार या नवरात्रि और दीपावली के दौरान की जाती है। पीले या लाल कपड़े से साफ वेदी सजाएं। केंद्र में छवियां या संयुक्त अष्टलक्ष्मी यंत्र रखें। घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। षोडशोपचार (सोलह-चरण) पूजा करें। पुष्प अर्पण के दौरान प्रत्येक लक्ष्मी का नाम और गुण बोलते हुए अलग फूल अर्पित करें: "आदि लक्ष्म्यै नमः, धन लक्ष्म्यै नमः..." अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें। कमल के फूल, पीले गेंदे के फूल, हल्दी, कुमकुम और सोने के रंग का कपड़ा अर्पित करें। लक्ष्मी आरती के साथ समापन करें और खीर या मीठे पोंगल का प्रसाद वितरित करें।

शुभ मुहूर्त

दीपावली — विशेषकर कार्तिक अमावस्या की शाम को लक्ष्मी पूजा — अष्टलक्ष्मी पूजा का सर्वोच्च अवसर है। वर्ष भर शुक्रवार, विशेषकर शुक्ल पक्ष के शुक्रवार, शुभ रहते हैं। शारद नवरात्रि एक और महत्वपूर्ण अवसर है। अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) को वर्ष का सर्वोत्तम दिन माना जाता है।

आवश्यक सामग्री

  • ·अष्टलक्ष्मी छवियां या संयुक्त यंत्र
  • ·पीला या लाल वेदी कपड़ा
  • ·कमल के फूल
  • ·पीले गेंदे के फूल
  • ·घी का दीपक
  • ·हल्दी
  • ·कुमकुम
  • ·अगरबत्ती
  • ·कपूर
  • ·सोने के रंग का वस्त्र अर्पण
  • ·पंचामृत
  • ·खीर या मीठा पोंगल (नैवेद्य)
  • ·नारियल
  • ·पान और सुपारी
  • ·अष्टलक्ष्मी स्तोत्र पाठ

सामान्य प्रश्न

प्र.अष्टलक्ष्मी पूजा क्या है?

अष्टलक्ष्मी पूजा देवी लक्ष्मी के आठ प्रमुख स्वरूपों की आराधना है, जिनमें से प्रत्येक समृद्धि और कल्याण के एक विशेष क्षेत्र की अधिष्ठात्री हैं। आठ स्वरूप हैं: आदि लक्ष्मी (आदिम, शाश्वत स्वरूप), धन लक्ष्मी (मौद्रिक धन की देवी), धान्य लक्ष्मी (कृषि समृद...

प्र.अष्टलक्ष्मी पूजा के क्या लाभ हैं?

अष्टलक्ष्मी पूजा एक साथ समृद्धि के सभी आठ क्षेत्रों में आशीर्वाद प्राप्त कराती है। उपासकों को प्रचुर धन और वित्तीय स्थिरता (धन लक्ष्मी), खाद्य सुरक्षा और कृषि सफलता (धान्य लक्ष्मी), राजसी अनुग्रह और नेतृत्व शक्ति (गज लक्ष्मी), संतान और वंश के आशीर्वाद (संतान लक्ष्मी), बाधाओं पर विजय का साहस (वीर लक्ष्मी), प्रतियोगिताओं में सफलता (विजय लक्ष्मी), तीव्र बुद्धि और शैक्षणिक सफलता (विद्या लक्ष्मी) और आदिशक्ति का मूल अनुग्रह (आदि लक्ष्मी) प्राप्त होता है।

प्र.अष्टलक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

दीपावली — विशेषकर कार्तिक अमावस्या की शाम को लक्ष्मी पूजा — अष्टलक्ष्मी पूजा का सर्वोच्च अवसर है। वर्ष भर शुक्रवार, विशेषकर शुक्ल पक्ष के शुक्रवार, शुभ रहते हैं। शारद नवरात्रि एक और महत्वपूर्ण अवसर है। अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) को वर्ष का सर्वोत्तम दिन माना जाता है।

प्र.अष्टलक्ष्मी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

अष्टलक्ष्मी छवियां या संयुक्त यंत्र, पीला या लाल वेदी कपड़ा, कमल के फूल, पीले गेंदे के फूल, घी का दीपक, हल्दी, कुमकुम, अगरबत्ती, कपूर, सोने के रंग का वस्त्र अर्पण, पंचामृत, खीर या मीठा पोंगल (नैवेद्य), नारियल, पान और सुपारी, अष्टलक्ष्मी स्तोत्र पाठ।

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